ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 10 May 2026
मग़रूर कहते हो
वफादारी,हयादारी,के फन से.......दूर कहते हो,
न जाने क्या समझते हो मुझे,मगरूर कहते हो,
मगर हूँ मुत्मईन मेरी हकीक़त को समझते हो,
ये अच्छा है मुहब्बत में मुझे...माजूर कहते हो...
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उर्मिला माधव...
मुत्मईन-----निश्चिन्त,
मगरूर------घमंडी ,
माजूर----- लाचार
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