ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 3 May 2026
डराने लग गईं
दह्र की वीरानियाँ इतना डराने लग गईं,
ख़ाब के परदे निगाहों से हटाने लग गईं
ज़िन्दगी कुछ भी नहीं, ये साफ़ ज़ाहिर हो गया
जब बड़ी तादाद में जानें ठिकाने लग गईं..
उर्मिला माधव
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