ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 4 May 2026
अपनी भी कदरदानी
बे-इन्तेहा हुई है अपनी भी क़दरदानी,
जितनी करी है आपने काफ़ी है मेहरबानी,
कितना जियेंगे आखिर,मरना तो है हमें भी ,
शिरक़त को आइयेगा जब हो क़ुरानख़ानी...
उर्मिला माधव...
5.5.2014...
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