Friday, 31 January 2020

क़ामिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो......जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है.....यहाँ साहिल नहीं होता...
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koii ishq-o-muhabbat main,mahe qaamil nahii hotaa,
ye wo rutbaa hai jo har shakhs ko haasil nahin hotaa,
bahut gahraaii hai dekho,junoon-e-ishq main jaakar,
samandar hii samandar hai,yahaan saahil nahin hotaa...
उर्मिला माधव...
१.२.२०१४

अच्छी लगी

सारी दुनियां घूम के जब देख ली,
अपने घर को वापसी अच्छी लगी..
उर्मिला माधव
1.2.2018

रंग लाने दो

जो कोई आग हो दिल में तो उसको रंग लाने दो,
हुजूम-ए-दर्द को यूँ ही कहीं ना डूब जाने दो,
जो ये भरपूर साज़िश है ज़माने की ज़माने से,
कभी ख़ामोश रहकर भी कोई तूफ़ान आने दो।..
उर्मिला माधव..
31.1.2013

सांस कैसे लेंगे हम

<3 <3
Kitni saari bandishen hain tumko paane main sanam,
tum nahin mil paaye to phir saans kaise lenge hum...??  Urmila Madhav..

सोलह दूनी आठ है

दोस्ती हो या मुहब्बत,बस खरैरी खाट है,
जो भी है सब बेसबब है,इन्तिहाई चाट है,
जैसे जी चाहे निभालो,आपकी मर्ज़ी है ये,
देखलो इसका पहाड़ा,सोलह दूनी आठ है..

Monday, 27 January 2020

काम कर दें

कभी तो ऐसा भी काम करदें
सवेरे उठ कर सलाम करदें
किसीकी नींदों से क्या ग़रज़ हो,
शुरू अभी हों ऑ शाम करदें
उर्मिला माधव
28.1.2018

सहारा देते हैं

जब भी मुश्किल ज़ीने हम तै करते हैं
दीवारों के साए सहारा देते हैं
उर्मिला माधव

बेवफ़ा है

2014 में लिखी एक ग़ज़ल---

ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है,
हाँ मगर दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है,

क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं,
गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ्हा है,

बारहा तन्हाइयां हैं,बारहा वीरां सफ़र भी,
क्या समझते हो महज पहली दफा है??

रंजिशें जमकर निभायीं वक़्त ने भी, 
ज़िन्दगी में हर कोई मुझसे खफा है,

वक़्त की...महबूब की,तक़दीर की या,
आप सब बतलाइये किसकी ज़फा है?? 
उर्मिला माधव...
27.1.2014..

पाबंदियां

दिल पे हैं पाबंदियां और तयशुदा है हर हिसार,
जाने उसने क्यूँ रखा है, अब तलक मुझको शुमार,
उर्मिला माधव

हज़ारों फ़ैसले

बेटू ....
वक़्त ही बदले है, दुनिया के हज़ारों फ़ैसले,
जिस्म की रफ़्तार अपने तौर पे रहती है बस,
उर्मिला माधव

Thursday, 23 January 2020

मुस्कुराते हैं

गहरे ज़ख़्मों पे चोट खाते हैं,
अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं,
ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा,
रात होते ही टूट जाते हैं,
दर्दे क़ुरबत से रू-ब-रू होकर,
चश्मे ग़िरियाँ में डूब जाते हैं 
उर्मिला माधव..
24.1.2013
२४.१.२०१३

शोहरत की

मुझको ख़ाहिश कहाँ है शोहरत की,
जो भी कुछ है ,..मेहर है क़ुदरत की,
मेरी उल्फ़त तो ,....बस कलम से है,
उम्र भर ,...इसके साथ शिरक़त की, 
#उर्मिला
24.1.2015...

गुथ्थम गुथ्थ है

रोक कर कोई दिखाये,जो ये गुथ्थम गुथ्थ है,
रात-दिन चर्चा सियासत पर करो ये मुफ्त है,
उर्मिला माधव...
24.1.207

शनास दुनिया

अरबों-खरबों शनास दुनियां,
तेरे इलज़ाम से जड़ी दुनियां,
तेरी नज़रों में बस पड़ी दुनियां,
कौन ख़्वाहिश में किसकी रहता है,
किसके रस्ते में है खड़ी दुनियां?
चलते-चलते थके हुए से क़दम,
रोज़ कुछ दूर और चलते हैं,
रोज़ तकते हैं अपनी वीरानी,
टूट कर बैठ तो नहीं जाते,
और चलते हैं,और चलते हैं,
रहगुज़र साथ साथ चलती है,
ज़िन्दगी आदतन निकलती है,
गिरती पड़ती है फिर संभलती है,
जिस्म की आदतों में ढलती है,
ये ही दुनियां है,यूँ ही चलती है,
उर्मिला माधव,
23.1.2017

गवाही हूँ

मैं ........सियह रात की गवाही हूँ,
ख़ुद बख़ुद उसकी आवा-जाही हूँ,
कुछ परिंदों के ....पंख बिखरे हुए,
ज़ेह्न-ए-गुलज़ार की .....तबाही हूँ
उर्मिला माधव..
23.1.2017

हो जाएंगे

कितनी नाफ़र्मानियों का ज़िक्र हो,
कहते कहते बद ज़ुबाँ हो जाएंगे
उर्मिला माधव
23.1.2018

Sunday, 19 January 2020

मसरूफ़ हूँ

गैर के हाथों में उसने......आईना देकर कहा ,
तुम चली जाओ यहाँ से मैं बहुत मसरूफ हूँ ....
उर्मिला माधव...
20.1.2014.

दीवारें

अब ये दीवारें। ..बड़ी होने लगी हैं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव। 
20 .1 .2017

शैफ़ ने

शैफ ने कितना सजाया गोश्त को,
गोकि शामिल है सफ़र तक़लीफ़ का
उर्मिला माधव

ज़माने के लिए

आये हैं वो क्यूँ हमें अब आज़माने के लिए,
छोड़ तो हम आये हैं उनको ज़माने के लिए...
उर्मिला माधव...
२०.१.२०१४.

भारी रहा

दिल के बहलाने को सौ तरक़ीब कीं,
उम्र भर दिल ही बहुत भारी रहा ..
उर्मिला माधव ..
20.1.2017

गुंजाइश

अब ये दीवारें। ..बड़ी होने लगी हैं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव। 
20 .1 .2017

दुनिया उतार फेंकी है

मैंने दुनिया उतार फेंकी है,
जिसका जी चाहे वो पहन डाले
उर्मिला माधव

अख़बार नहीं

दिल मिरा तेरी निगाहों का तलबगार नहीं,
एक इंसां हूँ, तेरे द्वार का अख़बार नहीं,
::
Dil miraa teri nigahon ka talabgar nahiN,
Ek insaaN hun tere dwar ka akhbaar nahiN..
उर्मिला माधव

Saturday, 18 January 2020

मरासिम है

सहेली मुझसे ये बोली,कहाँ रिश्ता मरासिम है ??
फरेबों की लड़ी पर देर तक हँसते रहे हम भी...
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

जायज़ है

दिमाग़ी ख़ूबियों पर फ़ख़्र करना ख़ूब जायज़ है,
कभी ऐसा भी होता है ज़माना दिल में हँसता है...
उर्मिला माधव...
19.1.2015..

भरम रखना

तमाशा ख़ूब कर लेना,मगर इतना भरम रखना,
मुक़ाबिल हों कभी जो हम तो खुलके मुस्कुरा पाएं..
उर्मिला माधव...
19.1.2015

मांजा टूट जाता है

पतंगें जब उड़ाते हैं तो उसमे ढील देते हैं,
वगरना खींचातानी से तो मांजा टूट जाता है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

करिश्मा ही सही

ये उसकी तेज़ निगाही का करिश्मा ही सही,
फिर भी क़ाबिज़ न हुआ दिल पे ये मंज़र कोई...

Ye uski tez nigaahii ka karishma hi sahii,
Phir bhi qabiz n hua,dil pe ye manzar koii...
उर्मिला माधव ..
18.1.2016

बाक़ी है

अभी संमझी कहाँ तुमने समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2018

ऊंची गगन सी

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी,  
वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??
मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों, 
किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं?? 
उर्मिला माधव...

झूठ की शक़्ल

झूठ की शक़्ल ही अजब देखी,
ये न बतलाएंगे ....के कब देखी,
ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको,
जो के बे नाम .....बे नसब देखी,
उर्मिला माधव

Thursday, 16 January 2020

सुकूं की बात

उसकी समझ में आये क्यूं, मेरे सुकूं की बात,
जो वाक़ये को वाक़ये से बढ़के ले गया 
उर्मिला माधव .
17.1.2017

बाक़ी है

अभी संमझी कहाँ तुमने....समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2017

लफ़्फ़ाज़ है

गिरया उसका हश्र होना लाज़िमी है,
जो ख़यालों से फ़क़त लफ़्फ़ाज़ है...
उर्मिला माधव,
17.1.2018

Wednesday, 15 January 2020

रहोगे यूं

कितना हसद करोगे मियाँ मर रहोगे यूँ,
ये तर्बियत मिली है तुम्हें किस जहान से......
उर्मिला माधव...
16.1.2015....

आसमां लिखें

शेर-ओ-सुखन का रंग भी कितना अजीब है,
रहते हैं सब ज़मीं पै .....मगर आसमां लिखें,
दिल रंजग़र ....ऑ आँख में आंसू भी ख़ूब हैं,
जलती हुई क़लम से मगर .....शादमां लिखें.....
उर्मिला माधव...
16.1.2017....

Tuesday, 14 January 2020

हो जाए तो

ज़िंदगी ने जाने कितने ....रंग ओढ़े हैं यहां,
क्या करें ये ज़िन्दगी ही बेवफ़ा हो जाए तो
उर्मिला माधव
15.1.2018

Monday, 13 January 2020

जारी रखें

ज़ुबान शीरीं रखें ख़ूब क़द मयारी रखें,
दुआ सलाम का इक सिलसिला भी जारी रखें...
उर्मिला माधव

उठाते हैं

हम उनके द्वार पे जाते हैं,लौट आते हैं,
वो उसके बाद भी तो उंगलियां उठाते हैं
उर्मिला माधव
14.1.2018

लगती है

रूह तो मर गई सी लगती है,
ज़िन्दगी डर गई सी लगती है,
बेबसी राह में मिली थी कभी,
अब मिरे घर गई सी लगती है
उर्मिला माधव

सानी नहीं होता

मुहब्बत करने वालों का कोई सानी नहीं होता,
बिना खोले ही ये मजमून ख़त का भांप लेते हैं....
उर्मिला माधव....
13.1.2015

धोका दिया

यूँ तो बन कर दोस्त ही आया था वो,
बाद उसके ....उम्र भर धोका दिया....
#उर्मिलामाधव
13.1.2016

Sunday, 12 January 2020

परदे रहे

उसकी जानिब से बहुत परदे रहे,
दुश्मनों ने आके सब बतला दिया...
#उर्मिलामाधव,
13.1.2016

Friday, 10 January 2020

नूर ए हिंदुस्तान हुई

ग़ैर मुल्क मैं चर्चे इसके,नूर-ए-हिन्दुस्तान हुई,
लाशों के अम्बार पे बैठी दिल्ली कब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से परचम भी लहराता है,
किसे खबर है इसके पीछे,किसकी जाँ कुर्बान हुई...
उर्मिला माधव...
11.1.2014...

देखा किये

जाने वाला कह गया था, आ रहे हैं लौट कर,
द्वार घर का खोल कर हम उम्र भर देखा किये...
उर्मिला माधव

तमाशा ज़िंदगानी है

तमाशा,ज़िन्दगानी है, अजब दुनिया-ए-फ़ानी में,
सफ़र है काफ़िलों में और अकेले कूच करना है,
उर्मिला माधव...

Thursday, 9 January 2020

झुका पाई हूँ

मिरे आक़ा तेरी  दुनियावी रस्मों की क़सम,
मैं किसी तौर भी गरदन न झुका पाई हूँ..
उर्मिला माधव..
10.1.2017

दुनिया

ये इश्क़ो मुहब्बत की दुनियां,
हर शख़्स के दिल को भाती है,
कुछ हम जैसे दीवाने हैं जो 
रंज गवारा करते हैं
उर्मिला माधव

Wednesday, 8 January 2020

तस्वीर देखिए

अब ताज़िराते हिन्द की तस्वीर देखिये, 
हर जाविये से मिट रही तक़दीर देखिये ,

कुछ ठीकरों में बेचता इंसान अपने ख्वाब, 
चलती कहाँ है कोई भी तदवीर देखिये,

उफ़ गर्द में निहां है यहाँ आदमी की ज़ात, 
हर पाँव अब हुआ है यूँ ज़ंजीर देखिये,

रहजन हों सलातीन तो बुनियाद भी है खाक़, 
लुटती हुई वतन की ये जागीर देखिये,

औक़ात अब बशर की कहाँ कोई है जनाब , 
कुछ शोहदों के हाथ में शमशीर देखिये... 
उर्मिला माधव.... २९.८.२०१४....

Tuesday, 7 January 2020

एक हंसी अबोध सी

एक हंसी,अबोध सी,
हिला देती है,अंतर्मन को,
पथ्थरों की श्रृंखलाएं,
मार्ग कंटक पूर्ण हैं सब,
सूर्य की कुछ रश्मियां हैं
और निहित है आग इनमें,
सामना करना न जाने,
कौन समझायेगा उसको,
वो जो है निश्छल कली सी,
मुक्त होना चाहती है,
चाहती उड़ना,गगन में,
मैं सहम कर देखती हूँ,
याचना ईश्वर से करके,
उसकी खुशियां मांगती हूँ...
उर्मिला माधव 
8.1.2017

और जुदा

हमसे कुछ हो भी सका तो सिर्फ़ ये,
सर झुकाया हाथ जोड़े 
और जुदा.
उर्मिला माधव

दिल मोअतबर न था

Main janti thi dil ye kabhi motbar n tha,
Ye bhi ajeeb mod par aa kar dahal gaya,
मैं जानती थी दिल ये कभी मोतबर न था,
ये भी अजीब मोड़ पर आ कर दहल गया...
उर्मिला माधव
8.1.2018

Monday, 6 January 2020

छुपा भी लिया

मैंने सजदे में सर ...झुका भी लिया,
अस्ल जो..ज़ख़्म था छुपा भी लिया,
आज़माइश भी ...सब की  ख़ूब हुई,
जितना चाहा था वो दिखा भी लिया...
उर्मिला माधव..
7.1.2017

दिखाती रही

ज़िन्दगी ........दर-ब-दर घुमाती रही,
जाने किस-किस का घर दिखाती रही,
ख़ुद ही .........हिम्मत को दाद दी मैंने,
दुनियां .......बुनियाद पर हिलाती रही..
उर्मिला माधव..
7.1.2017

उठ जाओ

चार मिसरे Siya Sachdev जी के लिए ...

यूँ न हलकान हो के मुुरझाओ,
अपना उन्वान हो के उठ जाओ,
ये जो दुनियां है ये किसीकी नहीं,
ख़ुद ही तूफ़ान हो के उठ जाओ..
उर्मिला माधव..
7.1.2017

Sunday, 5 January 2020

ज़रूरी हो गया

कुलबुलाता फिर रहा था गोकि इक ज़हरीला सांप,
आस्तीनें झाड़ना बेहद ज़रूरी हो गया.
उर्मिला माधव,
6.1.2018

Friday, 3 January 2020

ओढ़ रजाई

aadarneeyRakesh Rakesh Achal ji ki kavita par ek comment unhin ki tarz par :-)

hamne pahle hi kaha ho jaao taiyaar,
haar jeet k mamle hote hain bekaar,
hote hain bekaar mat karo guththam guththa,
khaa lo badhiya paan,lagake choona kaththa...
kahen Urmil kaviraai so raho odh rajayi,
kisne jana neend tumhen aayi na aayi..   :-)  Urmila Madhav

अड़नी थी

बात कुछ इस तरह बिगड़नी थी,
अपनी-अपनी जगह पै अड़नी थी,
सब को इक दूसरे से शिकवा था 
खुद-ब-खुद ही लड़ाई लड़नी थी....
 Urmila Madhav...
4.1.2015...

शोर मचाते हैं

बाहर की आवाज़ सुनाई देगी क्यों,
भीतर .जब सन्नाटे शोर मचाते हैं...
उर्मिला माधव 
4.1.2016

दब गए

सब दुआएं थीं ....तहे दिल से अगर,
किन तहों में,दिल,दुआ सब दब गए 

sab duaen thin ......-tahe dil se agar
kin tahon men dil dua sab dab gaye 
Urmila Madhav
4.1.2016

फ़िक़्र ए ज़र्फ़ है

हम तो समझ रहे थे उन्हें फ़िक़्र-ए-ज़र्फ़ है,
महफ़िल में उनको देख के हैरान रह गए...
उर्मिला माधव

Thursday, 2 January 2020

गुज़र

jee rahe hain zindagi kuchh aise haal se,
jaise kisi bhi haal main hoti nahin ghuzar,
Urmila Madhav

स्थितप्रज्ञ

एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,