Thursday, 31 January 2019

साहिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो......जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है.....यहाँ साहिल नहीं होता...
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koii ishq-o-muhabbat main,mahe qaamil nahii hotaa,
ye wo rutbaa hai jo har shakhs ko haasil nahin hotaa,
bahut gahraaii hai dekho,junoon-e-ishq main jaakar,
samandar hii samandar hai,yahaan saahil nahin hotaa...
उर्मिला माधव...
१.२.२०१४

देख ली

सारी दुनियां घूम के जब देख ली,
अपने घर को वापसी अच्छी लगी..
उर्मिला माधव
1.2.2018

चाट है

दोस्ती हो या मुहब्बत,बस खरैरी खाट है,
जो भी है सब बेसबब है,इन्तिहाई चाट है,
जैसे जी चाहे निभालो,आपकी मर्ज़ी है ये,
देखलो इसका पहाड़ा,सोलह दूनी आठ है.....
उर्मिला माधव

जाने दो

जो कोई आग हो दिल में तो उसको रंग लाने दो,
हुजूम-ए-दर्द को यूँ ही कहीं ना डूब जाने दो,
जो ये भरपूर साज़िश है ज़माने की ज़माने से,
कभी ख़ामोश रहकर भी कोई तूफ़ान आने दो।..
उर्मिला माधव..
31.1.2013

जलवे

महसूस हो रहे थे,कुछ आहटों के जलवे,
आगाह कर रहे थे,टकराहटों के जलवे,
उर्मिला माधव

Wednesday, 30 January 2019

पारा पारा हो गया

जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव.

कहाँ होते बड़े

दरमियाना क़द हमारा, हम कहाँ होते खड़े,
दह्र में कब था ठिकाना, हम जहां होते बड़े,
उर्मिला माधव

दूर जा बसें

सबको मुहब्बतों से नवाज़ा किये हैं हम,
अब सोचते हैं , सबसे कहीं दूर जा बसें
उर्मिला माधव
30.1.2019

पारा पारा हो गया

जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव.

बात करते हो

तुम बहारों की बात करते हो,
यानी यारों की बात करते हो,
मेरी नज़रों में सिर्फ़ ये सच है,
उलझे तारों की बात करते हो,
उर्मिला माधव
29.1.2019

Tuesday, 29 January 2019

दिखाई दे

bahut armaan hai dil ka ki wo manzar dikhayi de,
milaaye hath jab dil se bina khanzar dikhayi de,
Urmila Madhav..
30.1.2013

चुकाता ही रहे

♥ ♥
kab talak koi kisiko aazmaata hi rahe ?
mol apni chahton ka kyun chukata hi rahe?
apna rutba bhoolke,dil be-sabab  sajde kare,
kyun kisi raste main koi sir jhukata hi rahe ? 
Urmila Madhav...
30.1.2013

बोले ही कहाँ

मैंने कुछ औराक खोले ही कहाँ,
इतने सारे सच थे,बोले ही कहाँ,
मुस्कुरा कर आँख ने देखा बहुत,
सच कहूं जज़्बात,तोले ही कहाँ,
उर्मिला माधव....
30.1.2017

परेशान कर दिया

दुनिया की हरक़तों ने .......परेशान कर दिया,
अपनी तरफ से हमको ....बयाबान कर दिया,
हिन्दू कहा हमें ........तो कभी और कुछ कहा,
जब दिल हुआ तो हमको मुसलमान कर दिया...
उर्मिला माधव
30.1.2015

खो दिया

अच्छे बुरे हों जैसे भी हम अपने साथ हैं,
प आपने तो ऐसे बुरों को भी खो दिया
उर्मिला माधव
30.1.2018

Monday, 28 January 2019

हट गई

मौन जब टूटा तुम्हारा,.....वेदना तब घट गई,
धुंध जितनी दृष्टि में थी,सब अचानक हट गई,
उर्मिला माधव
29.1.2015...

आकर देख

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं ....आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है, अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ,तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जायेगा,केवल पाँव बढ़ा कर देख...
उर्मिला माधव,
29.1.2017

पूरी जाति का

बस यही तो भेद है। मानव की पूरी जाति का,
अनुकरण करता रहा है।व्यर्थ झूठी ख्याति का,
भावना जो व्यक्त करदे। वो कहाँ वाणी निकृष्ट??
स्वयं ही करता विभाजन धर्म और प्रजाति का...
उर्मिला माधव...
13.9.2016

किरदार

थक के रो जाते हैं .....किरदार निभाने वाले,
इस क़दर दाग़ लगाते हैं .........ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने .........नहीं होते सुनाने वाले,
उर्मिला माधव
29.2015

नहीं हुआ

वो शख़्स किसी और का होता भी तो कैसे
जो शख़्स अपने आप का हरगिज़ नहीं हुआ
उर्मिला माधव
29.1.2016

Sunday, 27 January 2019

अनजान ही रहा है

मेरा सफ़र हमेशा अनजान ही रहा है,
दुश्मन भी तो हमेशा इन्सान ही रहा है,
हर गाम पै हैं साथी ये रास्ते के पत्थर,
इन पत्थरों का मुझ पर अहसान ही रहा है। 
उर्मिला माधव..
28.1.2013

ज़िंदाबाद क्या

जब इन्क़लाब ही नहीं तो ज़िन्दाबाद क्या ?
हासिल न हों नतीजे तो फ़िर ज़िहाद क्या?
रस्ता ही भू ल बैठे ज़ाहिद हो या बिरहमन,
जब एक ही हो मन्ज़िल तो फ़िर फ़साद क्या ? 
उर्मिला माधव..
28.1.2013

कहानी --सबीहा

मुम्बई के स्ट्रेंड सिनेमा के बस स्टॉप ओर सबीहा खड़ी-खड़ी ऊब गई थी, बस थी के आने का नाम ही नहीं ले रही था और रात गहराती जा रही थी,अब उसका दिल घबराने लगा था क्योंकि वो बहुत अच्छी तरह से जानती थी के उसकी अम्मी गेट पर ही खड़ी रहेंगी जब तक वो घर पहुंच नहीं जाती
       वो ये भी जानती थी कि बहुत देर तक बस स्टेण्ड पर खड़े रहना सुरक्षित नहीं था,बहुत घबराई हुई थी क्योंकि धीरे धीरे वक़्त खिसकता ही जा रहा था उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे जो कि वो टैक्सी पर ख़र्च कर पाती,एक छोटी सी नौकरी करती थी किसी स्कूल के दफ़्तर में स्टेनो का काम करती थी जिससे उसका और उसकी अम्मी का आसानी से गुज़र हो जाया करता था।
              साधारण नाक-नक्श किंतु बहुत आकर्षक वयक्तित्व की मालकिन थी बगल से गुजरने वाला एक भी इनसान उसकी तरफ़ देखे बग़ैर नहीं जा पाता था,अब वो बहुत चिंतित हो गई थी और सोच रही थी कोई टैक्सी लेलेनी चाहिए क्या? मीटर शुरू होता था 2.25 पैसे से कोलाबा पहुंचने में अच्छा ख़ासा अमाउंट आ जाने वाला था पर मरता क्या न करता वाली कंडीशन में उसने टैक्सी लेली और घर की तरफ़ चल दी।
                   वो कई दिनों से नोट कर रही थी कि बस स्टैंड पर कोई लड़का उसके पीछे खड़ा रहता था और जब वो बस में बैठ जाती तब वो कहीं चला जाता था पर बहुत ज़ियादः ध्यान उसका नाहीं था उसका उस तरफ़ लेकिन आज उसको वो याद हो आया डरी हुई सहमी सी टैक्सी में बैठी हुई सोच रही थी के आज वो भी नहीं था बस स्टैंड पर और बहुत अजीब कसमसाहट जी में हो रही थी पर उसने सोचा कौन वो उसका कोई लगता था मुझे क्या पड़ी इतना सोचने की नहीं था, न सही।अब सोच रही थी पैसे कहाँ से दूंगी, ख़ैर अम्मी से पूछूँगी अंदर जाकर ,अक्सर माताओं के पास कुछ पैसे ज़रूर होते हैं और उसका घर आ गया उसने टैक्सी ड्राइवर को बिना देखे ही कहा,भैया ज़रा सा रुक जाना मैं घर से पैसे लाकर देती हूँ और घर के अंदर चली गई मां रोती हुई मिली बेटी को छाती से लिपटा लिया और भी रोने लगी सबीहा को अचानक ही ध्यान आया टैक्सी वाले का और माँ से पैसे मांगे मां ने पैसे दिए और खाना लगाने चली गईं।
                  सबीहा पैसे लेकर बाहर निकली तो देखा कि न तो टैक्सी थी और न टैक्सी वाला, बड़ी परेशान हो गई इधर-उधर बहुत नज़र डाली लेकिन वो तो नदारद हो चुका था। परेशान सी सोचने लगी ये क्या बात हुई वो टैक्सी लेकर बस स्टैंड पर बहुत देर से खड़ा था और मैं उसीके पास चली गई थी वो बहुत डर गई।
                     ख़ैर दूसरे दिन दफ़्तर गई और शाम होते ही डर गई कहीं उस टैक्सी वाले से सामना हो गया तो ?
            अचानक ही वो लड़का फिर पीछे आ कर खड़ा हो गया और उसे न जाने क्यों एक राहत सी महसूस हुई ,और बस के आने पर वो बस में चढ़ी और वो हमेशा की तरह लौट गया,
              एक दिन अचानक मां बोली तुम्हारे लिए लड़का देख रहे थे तुम्हारे अजमेर वाले मामू ने एक लड़का बताया था और उन्होंने उसके घर वालों को तुम्हारी तस्वीर और तुम्हारे दफ़्तर का पता ठिकाना भी दे दिया था लेकिन वो लड़का आज यहां आया था बहुत ख़ूबसूरत और अच्छे ख़ासे बड़े घर का लग रहा था,हमें लगा कि हम उसके लायक नहीं हैं क्या कहें इसको पर तुम्हारी तस्वीर लाया था और बख़ुशी तुमसे शादी करने को तैयार है शादी बहुत सादा चाहता है लेकिन ज़िद ये है कि हम भी उसके साथ रहें लेकिन हम हरगिज़ नहीं माने न मानेंगे तुम भी उसको देख लेना।।
        दूसरे दिन एक सुंदर सी कार दरवाज़े पर आ कर खड़ी हुई और एक कारिंदा टाइप आदमी अंदर आया और बोला अनवर मियां आए हैं और आपसे मिलना चाहते हैं मां उठ कर गईं,सबीहा पर्दे की ओट में हो गई अनवर मियां पर नज़र पड़ते ही वो सन्न रह गई ये वही बस स्टेंड वाला लड़का था उसकी समझ में कुछ नहीं आया और घबरा कर रोने लगी।।
क्रमशः
उर्मिला माधव

Saturday, 26 January 2019

हटता रहा


raat badhti rahi waqt ghat-ta raha.
neend ka youn safar door hat-ta raha,
aankh dar par lagi thi magar kya kahen,
tum na aaye magar daur kat-ta raha...

हो जाएगा

चल,रही बाज़ी,यहीं पर फैसला हो जायेगा,
जो जुदा हो जाएगा वो बेवफ़ा कहलायेगा,
#उर्मिला
27.1.20155

ख़म बहुत

Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
::
जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
#उर्मिलामाधव
27.1.2016

Wednesday, 23 January 2019

शोहरत की

मुझको ख्वाहिश कहाँ है शोहरत की,
जो भी कुछ है ,..मेहर है क़ुदरत की,
मेरी उल्फ़त तो ,....बस कलम से है,
उम्र भर ,...इसके साथ शिरक़त की,
#उर्मिला
24.1.2015...

मुफ़्त है

रोक कर कोई दिखाये,जो ये गुथ्थम गुथ्थ है,
रात-दिन चर्चा सियासत पर करो ये मुफ़्त है,
उर्मिला माधव...
24.1.207

Tuesday, 22 January 2019

गवाही हूँ

मैं ........सियह रात की गवाही हूँ,
ख़ुद बख़ुद उसकी आवा-जाही हूँ,
कुछ परिंदों के ....पंख बिखरे हुए,
ज़ेह्न-ए-गुलज़ार की .....तबाही हूँ
उर्मिला माधव..
23.1.2017

ज़िक्र हो

कितनी नाफ़र्मानियों का ज़िक्र हो,
कहते कहते बद ज़ुबाँ हो जाएंगे
उर्मिला माधव
23.1.2018

Monday, 21 January 2019

एक रंग है जाएं

बलिहारी वा प्रीत की,जामें दो न समाएं,
मैं पिय की पिय हैं मेरे,एक रंग है जाएं...
उर्मिला माधव...
22.1.2015

समझते हैं

वो जो पथ्थर तराशा करते हैं,
आंसुओं को अदा समझते है...
#Urmila ....
22.1.2015...

आकिल नहीं

ये तो सच है मैं कोई आकिल नहीं,
हाँ जहान-ए-अदब में काहिल नहीं,
देखती हूँ इक फ़क़त बाब-ए-सुखन,
बस किसी भी दौड़ में शामिल नहीं,
उर्मिला माधव ..
22.1.2017

आदम ज़ात हूं

मर्तबा इंसाँ है मेरा ............और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ,.....ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक .......क़िस्सा-ए-हालात हूँ,
उर्मिला माधव
22.1.2017

सुबह होगी

रात गहरी है,नींद आती है,
ख़ैर उम्मीद है सुबह होगी,
उर्मिला माधव

दर्द अपना

दर्द अपना,...बयान कर तो दिया,
आपको ....बेज़ुबान कर तो दिया,
जिसमें ….तनहाई अपनी जीते थे,
ये लो ख़ाली मकान कर तो दिया...
उर्मिला माधव..

Sunday, 20 January 2019

दिल सो रहा है

जाओ अपनी डुगडुगी लेकर यहाँ से,
नींद में हूँ मैं, मेरा दिल सो रहा है
उर्मिला माधव,
21.1.2018

नसब देखी

झूठ की शक़्ल ही अजब देखी,
ये न बतलाएंगे ....के कब देखी,
ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको,
जो के बे नाम ....बे नसब देखी,
उर्मिला माधव
जनवरी 2019

Saturday, 19 January 2019

आज़माने के लिए

आये हैं वो क्यूँ हमें अब आज़माने के लिए,
छोड़ तो हम आये हैं उनको ज़माने के लिए...
उर्मिला माधव...
२०.१.२०१४.

भारी रहा

दिल के बहलाने को सौ तरक़ीब कीं,
ज़िन्दगी भर दिल बहुत भारी रहा ..
उर्मिला माधव ..
20.1.2017

दर खोलने की

अब ये दीवारें.........बड़ी होने लगीं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव।
20 .1 .2017

तलबगार नहीं

दिल मिरा तेरी निगाहों का तलबगार नहीं,
एक इंसां हूँ, ....तेरे द्वार का अख़बार नहीं...

Dil mera teri nigahoN ka talabgaar nahiN
Ek insaaN hun tere dwaar ka akhhbar nahin..  
Urmila Madhav
20.1.2018

Friday, 18 January 2019

ज़माना

दिमाग़ी ख़ूबियों पर फ़ख़्र करना ख़ूब जायज़ है,
कभी ऐसा भी होता है ज़माना दिल में हँसता है...
उर्मिला माधव...
19.1.2015..

भरम

तमाशा ख़ूब कर लेना......मगर इतना भरम रखना,
मुक़ाबिल हों कभी जो हम तो खुलके मुस्कुरा पाएं..
उर्मिला माधव...
19.1.2015

रुख़ करले

गिरह्बंद शेर Dev Niranjan जी के शेर पर....

दुआ मिले है अगर ....तो दुआ भी झुक कर ले,
हवा का क्या है, वो चाहे जिधर का रुख़ कर ले..
उर्मिला माधव....
16.1.2015...

ज़रूरी है

मुझे तुमसे,तुम्हें मुझसे ....जुदा रहना ज़रूरी है,
मैं अहमक हूँ,..तुम्हारा नाख़ुदा रहना ज़रूरी है,
ये अच्छा है तुम्हारा दिल बहुत मज़बूत पत्थर है
मेरा बस नाम पत्थर पर ..खुदा रहना ज़रूरी है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015

टूट जाता है

पतंगें जब उड़ाते हैं तो उसमे ढील देते हैं,
वगरना खींचातानी से तो मांजा टूट जाता है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

Thursday, 17 January 2019

सोपान होते ही कहाँ हैं

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी, 
वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??
मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों,
किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं??
उर्मिला माधव...
१८.१.२०१४...

करिश्मा ही सही

ये उसकी तेज़ निगाही का करिश्मा ही सही,
फिर भी क़ाबिज़ न हुआ दिल पे ये मंज़र कोई...

Ye uski tez nigaahii ka karishma hi sahii,
Phir bhi qabiz n hua,dil pe ye manzar koii...
उर्मिला माधव ..
18.1.2016

ज़हमत तो करो

इक गुहर चाहिए, दुनियां को तलाशो जाकर,
हर सदफ़ खोल के देखो ये ज़हमत तो करो...
उर्मिला माधव ..
18.1.2017

Wednesday, 16 January 2019

तजरिबात

अच्छा हुआ के हमको तजरिबात हो गए,
वरना गधों की शक़्ल में क्या-क्या न पूछते !!!
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Achchaa huaa ke hamko .........।tajaribaat ho gaye,
Warnaa gadhon kii shaql main kya-kya n poochhte.....
#उर्मिलामाधव ..
17.1.2015

लफ़्फ़ाज़ है

गिरयां उसका हश्र होना लाज़िमी है,
जो ख़यालों से फ़क़त लफ़्फ़ाज़ है...
उर्मिला माधव,
17.1.2018

सुकूँ की बात

उसकी समझ में आये क्यूं, मेरे सुकूं की बात,
जो वाक़ये को ........वाक़ये से बढ़के ले गया
उर्मिला माधव .
17.1.2017

बाक़ी है

अभी संमझी कहाँ तुमने....समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2017

Tuesday, 15 January 2019

शेर ओ सुख़न का रंग

शेर-ओ-सुखन का रंग भी कितना अजीब है,
रहते हैं सब ज़मीं पै .....मगर आसमां लिखें,
दिल रंजग़र ....ऑ आँख में आंसू भी ख़ूब हैं,
जलती हुई क़लम से मगर .....शादमां लिखें.....
उर्मिला माधव...
16.1.2017....

अचानक

थक गए हैं, थक रहे हैं, और भी थक जाएंगे,
बस अचानक एक दिन स्टेज से हट जाएंगे..
उर्मिला माधव
16.1.2018

Monday, 14 January 2019

घर गई सी लगती है

रूह तो मर गई सी लगती है,
ज़िन्दगी डर गई सी लगती है,
बेबसी राह में मिली थी कभी,
अब मिरे घर गई सी लगती है
उर्मिला माधव
14.1.2019

Saturday, 12 January 2019

धोका दिया

उसकी जानिब से बहुत परदे रहे,
दुश्मनों ने आके सब बतला दिया...

यूँ तो बन कर दोस्त ही आया था वो,
बाद उसके ....उम्र भर धोका दिया....
उर्मिला माधव
13.1.2016

मजमून

मुहब्बत करने वालों का कोई सानी नहीं होता,
बिना खोले ही ये मजमून ख़त का भांप लेते हैं....
उर्मिला माधव....
13.1.2015

वो इतना सोचते कब हैं

किसीसे भी किसी जागीर की ख़्वाहिश नहीं मुझको,
मुहब्बत जिनको होती है वो इतना सोचते कब हैं ??
उर्मिला माधव...
13.1.2018

Friday, 11 January 2019

संभाल रख्खा है

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
हंसके दुनियां को टाल रख्खा है,
चश्म-ए-गिरयां नज़र नहीं आते,
इतना शीशे में ढाल रख्खा है,
उर्मिला माधव..
12.1.2017

कर तो दिया

दर्द अपना,...बयान कर तो दिया,
आपको ....बेज़ुबान कर तो दिया,
ग़म में ......जिसके सहारे जीते थे,
अब वो ख़ाली,मकान कर तो दिया...
उर्मिला माधव..
12.1.2018

बोलो

जहां ग़म हैं, वहां हम हैं
भला बोलो कहाँ कम हैं..?
उर्मिला माधव
12.1.2018

ख़ब्त

ख़ब्त सर पे सवार है उनके,
ज़ब्त सीने के पार है उनके,
लफ्ज़ भी बस "ग़ुरूर"बोलेंगे,
सख़्त मुंह में कटार है उनके...
उर्मिला माधव...

Thursday, 10 January 2019

नूर ए हिंदुस्तान

ग़ैर मुल्क मैं चर्चे इसके,नूर-ए-हिन्दुस्तान हुई,
लाशों के अम्बार पे बैठी दिल्ली कब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से परचम भी लहराता है,
किसे खबर है इसके पीछे,किसकी जाँ कुर्बान हुई...
उर्मिला माधव...
11.1.2014...

दुश्वारी--क़त-आ

कितनी लंबी पारी खेली है मैने,
ज़हमत कितनी सारी लेली है मैने

मेरे ग़म का कोई साझेदार नहीं
तनहा हर दुश्वारी झेली है मैंने,
उर्मिला माधव

ज़िंदगानी

तमाशा,ज़िन्दगानी है, अजब दुनियां-ए-फ़ानी में,
सफ़र है काफ़िलों में और..अकेले कूच करना है,
उर्मिला माधव...
11.1.2018

Wednesday, 9 January 2019

स्थितप्रज्ञ है

एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा...और जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,
1.1.2018

Tuesday, 8 January 2019

होगए हम

ज़िन्दगी पर उंगलियां उठती बहुत हैं,
इसलिए तस्वीर से ख़ुश हो गए हम...

Zindagi par ungliyan uthti bahut haiN,
Isliye tasveer se khush ho gaye ham...
Urmila Madhav
9.1.2017

Monday, 7 January 2019

दहल गया

Main janti thi dil ye kabhi motbar n tha,
Ye bhi ajeeb mod par aa kar dahal gaya,
मैं जानती थी दिल ये कभी मोतबर न था,
ये भी अजीब मोड़ पर आ कर दहल गया...
उर्मिला माधव
8.1.2018

बेसबब लगने लगी

जब बहुत छोटे थे अपना अक़्ल से रिश्ता न था,
अक़्ल क्या आई के दुनियाँ बेसबब लगने लगी
उर्मिला माधव
8.1.2017

हैरां हुए बेहद

हमारे डूबने तक वो किनारे पर हरासां थे,
मगर बाहर निकलता देखकर हैरां हुए बेहद
उर्मिला माधव

Friday, 4 January 2019

बादल छाए हैं

तस्वीर पर क़ता-------

आसमां पे लाल बादल छाये हैं,
किस लिए पंछी यहाँ मंडराए हैं?
फिर हुआ क्या हादसा कोई नया?
क्यूँ उफ़क पर ये ग़मों के साए हैं....
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aasmaan pe laal baadal chhaaye hain,
kisliye panchhi yahan mandraaye hain,
phir hua kya haadsa ............koii naya,
kyun ufak par ye gamon ke saaye hain...
#उर्मिलामाधव..
5.1.2016

Tuesday, 1 January 2019

बात करते हो

क्यूँ ज़माने की बात करते हो,
बिन मुहब्बत के,रात करते हो,

रात आँखों में कल कटी मेरी,
ख़त्म यूँ ही हयात करते हो,
उर्मिला माधव..
2.1.2017

आहों में

ग़ज़ब दीवानगी है ये,मुहब्बत की पनाहों में,
छलकने ही नहीं पाया ज़रा भी दर्द आहों में.

बहुत रूपोश रख्खा था ज़माने भर की नज़रों से,
जो मेरे दिल में रहता था उभर आया निगाहों में,
Urmila Madhav
2.1.2015