Monday, 30 April 2018

हर ग़ाम

हर ग़ाम इम्तिहां है,पर्चे बड़े कठिन हैं,
कैसे बताऊँ बोलो,कितने गरीब दिन हैं...
उर्मिला माधव...
1.5.2014...

Sunday, 29 April 2018

दैरो हरम

जब जहाँ तबियत हुई सजदा किया हमने वहीँ,
कौन इतना फ़र्क़ करता, घर है या दैर-ओ-हरम,
::::::
jab jahan tabiyat huii,sajdaa kiya hamne wahin,
kaun itna farq kartaa,ghar hai ya dair-o-haram

उर्मिला माधव,
30.4.2016

दोहा

महिमा मंडन स्वयम का,करें सभी श्रीमान,
वही दम्भ वश कर रहे...औरों का अपमान
उर्मिला माधव,
29.4.2017

Saturday, 28 April 2018

कामयाब नहीं

Wo haqiqat hai koii khwaab nahin,
Phir bhii tasviir ka jawaab nahin,
Yun to hain khushbuen bahut saari,
Uskii khushboo sii kaamyaab nahin....
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वो हक़ीक़त है कोई ख्वाब नहीं,
फिर भी तस्वीर का जवाब नहीं,
यूँ तो हैं .....खुशबुएँ बहुत सारी,
उसकी खुशबू सी कामयाब नहीं....
#उर्मिलामाधव...
29.4.2015...

बाक़ी हैं

पहले ही सब निशान बाक़ी हैं,
फिर नए इम्तिहान बाकी हैं....।
#उर्मिला

फ़िक्रमन्दी

फ़िक़्र मंदी और रक़ाबत,दोनों मिलकर आगए,
आगे क्या होना है ...ये भगवान जी बतलाएंगे..
उर्मिला माधव,
29.4.2017

Friday, 27 April 2018

न छोड़ा गया

कितने रंगों से दिल को झिंझोड़ा गया,
बिखरी साँसों को रह-रहके तोडा गया,
मेरी आदत यही थी तो होता भी क्या,
मुझसे लिखना-लिखाना न छोड़ा गया....
उर्मिला माधव...
28.4.2014..

इंतेहा करदे

Be-wafa ho ja magar yun, ke inteha karde,
Baad phir iske koii......tere muqabil n rahe,
::::
बे-वफ़ा हो जा मगर यूँ, के इन्तहा करदे,
बाद फिर इसके कोई तेरे मुक़ाबिल न रहे
Urmila Madhav....
28.4.2016

क़र्ज़

पानी के एक गिलास का जो कर्ज़ हो गया,
हम उम्र भर उसी की सतह पर खड़े रहे,
ग़म में शुमार होने लगा बार-ए-ज़िन्दगी,
ज़ख्मों के नक्श थे के,ज़िबह पर अड़े रहे...
उर्मिला माधव,
28.4.2017
पानी के इक गिलास का जो क़र्ज़ हो गया
हम उम्र भर ...उसी की सतह पर खड़े रहे ....
उर्मिला माधव,
28.4.2017

Sunday, 22 April 2018

सोई नहीं

ग़म मुसलसल साथ हैं,इसके सिवा कोई नहीं,
कितनी सदियों से हमारी चश्म-ए-नम सोई नहीं..
Urmila Madhav
23.4.2013...

आप सा कोई नहीं

भोले बाबा के नाम......

इस ज़मीन ओ आसमां पर आपसा कोई नहीं,
आप भोले ख़्वाब हैं,  इस ख़्वाब सा कोई नहीं,
आपके ही इस धुंए में .......घूमता सारा जहाँ,
इसलिए धुंधली है दुनियां साफ़ सा कोई नहीं....
उर्मिला माधव...
23..4.2017

रिश्ता नहीं

क्यूँ मुहब्बत और सुकूं में ....आपसी रिश्ता नहीं,
किस तरह का दर्द है के है भी और दिखता नहीं,
उर्मिला माधव...
23.4.2017....

हंसते रहे

दिल को बहलाने की आदत थी हमें,
इस लिए हम......उम्र भर हँसते रहे....
उर्मिला माधव।।।
23.4.2017

Friday, 20 April 2018

कमज़र्फ

तू ख़यालों से बहुत कमज़र्फ़ है,
ये हमारी आबरू पर हर्फ़ है।...Urmila Madhav
21.4.2013

टूटते रिश्ते

टूटते रिश्तों को फिर-फिर जोड़ने जाते रहे,
और ख़ाली हाथ ही घर लौट कर आते रहे,
इन्तिहाई कोशिशों का सिर्फ़ ये जलवा रहा,
बेवफ़ाई उनकी ठहरी, हम सज़ा पाते रहे।..Urmila Madhav
21.4.2013

तिरछोलपन

आचरण बतला रहा है,आपका तिरछोल पन,
आमरण रहता नहीं,यूँ भी किसीका बांक पन,
उर्मिला माधव...
२१.4.२०१४...------------- तिरछोलपन---- मक्कारी

औक़ात सस्ती

ये ज़माना...और इसकी ख़ुद परस्ती,
मुख़्तसर,इनसान की औक़ात सस्ती,
उर्मिला माधव...
21.4.2014...

मीज़ान और मियां जी

मीज़ान लेके बैठे.....बाज़ार में मियाँ जी,
हूँ मुल्तज़ी खुदा से,मुझको बचाए रख्खे..
उर्मिला माधव...
21.4.2014...

साज़िश हो गई

सोने न देगी उम्र भर मुझे टूटे लफ़्ज़ों की चुभन,
मुझे लग रहा है के नींद और तड़पन में साजिश होगई....
उर्मिला माधव...
21.4.2015..

ख़ूब दिखती हो

ग़म का ख़ाका जो खींचा कागज़ पर,
लोग बोले के .........ख़ूब लिखती हो...
अश्क़ पोंछे थे बस ..........हथेली से,
लोग बोले के .........ख़ूब दिखती हो...
उर्मिला माधव ...
21.4.2015....

शाइर हैं

हसद हटा के कभी आदमी को देखो तो,
वगरना कौन ये समझेगा आप शाइर हैं????
उर्मिला माधव..
21.4.2017..

हिसाब रखता है

हरेक सांस का हर पल हिसाब रखता है,
ज़माना तुझसे कहीं बढ़के चाहता है मुझे..
उर्मिला माधव,
21.4.2017

हलाक करना उन्हें

वो एक रंग में ...कहते नहीं हैं बातों को,
हलाक करना उन्हें,हर तरह से आता है..
उर्मिला माधव,
21.4.2017

गर्मी की शिद्दत

हज़ारों शेर कहने पर भी कुछ होगा नहीं हासिल,
ये जो गर्मी की शिद्दत है,किसी सूरत न कम होगी..
उर्मिला माधव..21.4.2017

Wednesday, 18 April 2018

छोड़ा न होता

वक़्त ने जो इस क़दर तोड़ा न होता,
साथ खुशियों ने कहीं छोड़ा न होता,
शौक़ हो जाता.....तिरे हाथों से पूरा,
जितना हो जाता वही थोड़ा न होता....
उर्मिला माधव...
19.4.2014...

आइंदा घूम रही हूं

तसवीरों के शहर में ज़िंदा घूम रही हूँ,
बिलकुल तनहा हूँ शर्मिंदा घूम रहो हूँ,
सोच रही हूँ उंगली से सब छूकर देखूं,
हो सकता है कुछ आइन्दा घूम रही हूँ....
#उर्मिलामाधव...
19.4.2015..

जो अगर फ़रहाद सब कुछ मान जाता

जो अगर फ़रहाद सब कुछ मान जाता,
ठोकरें हिस्से की उसके.....कौन खाता...??
::
Jo agar farhad sab kuchh maan jaataa,
Thokaren hisse kii uske kaun khaataa...
उर्मिला माधव...
19.4.2016...

डस रहा है आदमी को आदमी

तस्वीरी क़ता---
Das rahaa hai aadmi ko aadmi kya khoob hai,
Aisi fitrat kyun hamaare naam se mansoob hai,
Rah gaya hai munh khula hairat se ,sabko dekh kar,
Ham n apni zaat ko daste hain ye usloob hai..
&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&
डस रहा है आदमी को आदमी,क्या ख़ूब है,
इनकी फितरत क्यूँ हमारे नाम से मंसूब है,
रह गया है मुंह खुला हैरत से,सबको देख कर,
हम न अपनी ज़ात को डसते हैं,ये उसलूब है...
उर्मिला माधव,
19.4.2016

अस्त है

सांझ का सौन्दर्य है, मार्तंड लगभग अस्त है,
और बिना ही यत्न के,पीड़ा ह्रदय की ध्वस्त है....
उर्मिला माधव...
18.4.2014..

धुंए में खो गए

दिल कभी ज़्यादः दुखा बस रो लिए, चुप होगये,
ग़म सुलग कर बुझ गये और हम धुंए में खो गए ...
उर्मिला माधव....
18.4.2015...

Monday, 16 April 2018

दिल का

मुड़के पूछेंगे कभी हाल ज़रा बिस्मिल का,
इतना आसान नहीं तोड़के जाना दिल का।..Urmila Madhav
17.4.2013

प्रणेता है

कोई लेता है,कोई देता है,
कहता है विश्व विजेता है,
नायक बन...बैठा नेता है,
मानव का कौन प्रणेता है ?
उर्मिला माधव...
17.4.2014...

Saturday, 14 April 2018

निशानी मिट गई

रंजिशों की धार पर....कितनी निशानी मिट गईं,
सल्तनत कितनी मिटीं,कितनी बयानी मिट गईं,
किन दरख्तों की न जाने कितनी शाखें मिट गईं,
सब्ज़ पत्ते मिट गए......और नौजवानी मिट गईं,
मिट गए कितने सिकंदर.....और मिटी राहे जुनूं,
मिट गए हुक्काम हाकिम..सब कहानी मिट गईं....
उर्मिला माधव...
15.4.2014...
"ranjishon ki dhhar par kitni nishaani mit gayin,
saltanat kitni mitiin,or haq bayaanii mit gayin
kin darakhton ki na jaane kitni shaakhen mit gayin,
sabz patte mit gaye or naujawanii mit gaiin,
mit gaye kitne sikandar or mitii raah-e-junoon
mit gaye hukkaam haakim sab kahaanii mit gaiin.....
Urmila Madhav..."

गुनगुना हम रहे हैं

वफायें ठिकाने बदल लेंगी अपने,
संभल जाओ देखो यही वक़्त है बस,
अभी तक तुम्हें गुनगुना हम रहे हैं,
वगरना ये दिल भी बहुत सख़्त है बस....
उर्मिला माधव...
15.4.2015..

सन्नाटों ने घेरा है

सन्नाटों ने ...घर को आकर घेरा है,
कोने-कोने ......वीरानी का डेरा है,
टूटे-फूटे ख़्वाब पड़े मिल सकते हैं,
फ़िक़्र नहीं है इनका कौन लुटेरा है...
#उर्मिलामाधव...
15.4.2015...

ग़रज़ क्या है

आप तस्वीर सिर्फ़ देखा करें,
क्योंकि ताईद की ग़रज़ क्या है,
मेरी तहरीर पढ़के ज़ाहिर है,
मेरे लफ़्ज़ों की ये लरज़ क्या है...
#उर्मिलामाधव...
15.4.2015

Friday, 13 April 2018

चले आए

जो जगह छोड़ कर चले आए,
राबिते …..तोड़ कर चले आए,
ग़ैर मुमकिन है फ़िर वहाँ जाएँ,
राह जो मोड़ कर ...चले आए।।
Urmila Madhav.
14.4.2013

देखो ना

ज़िन्दगी.......तार-तार देखो ना,
ज़ख्म के......आर पार देखो ना,
ये भी हैरत है तुम समझ न सके,
आओ तब......बार-बार देखो ना....
उर्मिला माधव...
14.4.2014...

हल्की-हल्की

कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की,
मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी,
#उर्मिलामाधव....
14.4.2015..

आदमी समझे कोई

Ek sher.....

जीत और ज़िद में ही जिनकी ज़िन्दगी गुज़री जनाब
किसलिए फिर ......आदमी को आदमी समझे कोई....
उर्मिला माधव...
::::::::
Jiit or zid men he jinkii zindagi guzarii janaab
Kisliye phir..aadmii ko aadmii samjhe koii....
Urmila Madhav..
14.4.2016

होता नहीं

क्या करूँ मैं ज़िन्दगी में ज़िक्र ला-परवाही का,
दिल किन्हीं रंगीनियों से पुरअसर होता नहीं,

जिसको देखो दौड़ता फिरता है अपने ढंग से,
मरहलों का रास्ता पर मुख़्तसर होता नहीं,
उर्मिला माधव ...
14.4.2015

चलती हूँ मैं

पांव धंस जाते हैं मेरे.....इतनी गीली है ज़मीं,
ये मिरा कार-ए-हुनर है,आज भी चलती हूँ मैं....
उर्मिला माधव,
14.4.2017

ज़िन्दगी कुंदन हुई

दर्द के शोलों पे चल के,ज़िंदगी कुंदन हुई
अब भला लू के थपेड़े,.क्या बिगाड़ेंगे मेरा..
14.4.2017

Thursday, 12 April 2018

गमगुसारी

ज़िन्दगी करती न हरगिज़ ग़म गुसारी,
एक दिन हल्का तो एक दिन ख़ूब भारी ...
उर्मिला माधव....
zindagi kartii n hargiz.....gamgusaarii,
ek din halkaa to ek din khoob bhaarii....
Urmila Madhav....
13.4.2014...

राधा रख लिया है

नाम देखो अपना ..राधा रख लिया है,
सच मगर ये है कि आधा रख लिया है,

ये मिलाया जायेगा जब भी तुम्हारे नाम से,
तब पुकारे जाओगे तुम भी तो राधे श्याम से....
#उर्मिलामाधव....
13.4.2015।..

आज़माता ही रहे

कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
13.4.2015

Tuesday, 10 April 2018

पर्दा दुई का

अगर पर्दा दुई का है उसे कुछ कम नहीं समझो,
कोई दिल से उतर जाए ख़त्म रिश्ता वहीँ समझो,
उर्मिला माधव...
11.4.2014...

अज़ाब

ये जिस्म एक क़फ़स है,साँसें अज़ाब में हैं,
तू ज़िन्दगी के मालिक ,जिंदा बचाए रखना,
अश्कों से भीगे आरिज़,बेबाक़ हो गए हैं
दूरी हो चाहे जितनी,दिल तो मिलाये रखना....
#उर्मिलामाधव...
11.4.2015

आबे हयात रख लूँ

इंसाँ की ज़िन्दगी भी ......हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे ....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
1.4.2016

ग़ाम---क़दम
तौफ़ीक़---शक्ति
आब-ए-हयात--ज़िन्दगी का पानी--यानी ---अमृत
रहगुज़र--रास्ता
मुक़म्मल--अटल
आलिम---विद्वान..

Monday, 9 April 2018

गिनना पड़ता है

हमारे ख्वाब भी। .तनहाई में निखरते हैं,
वगरना भीड़ में तो वक़्त गिनना पड़ता है ....
उर्मिला माधव। ....
10 .10 .2017

ख़त्म हो गई

उसको मिटाके लोग क्या हासिल करेंगे अब?
जो ज़िन्दगी ......कभी की मेरी ख़त्म हो गई...
उर्मिला माधव ......
10.4.2015

Sunday, 8 April 2018

बादशा हुआ

जिस तक पहुंच नहीं है,वही बादशा हुआ,
वरना ज़मीं के लोग तो हम से ही हैं हुज़ूर..
उर्मिला माधव...
9.4.2017

Saturday, 7 April 2018

अहसास जगाए रखिये

सिर्फ़ अहसास जगाये रखिये,
दिल को बस ख़ास बनाये रखिये
टूट जाने से कुछ नहीं होगा,
उम्र भर आस लगाए रखिये........
#उर्मिलामाधव....
8.4.2015

तक़दीर का

जीतना और हारना तो खेल है तक़दीर का
हौसला तौलेंगे लेकिन हम ज़रा शमशीर का,
#उर्मिलामाधव...
9.4.2015..

राह क़ब्रिस्तान की

ताने-बाने ज़िन्दग़ी के .........राह क़ब्रिस्तान की,
जी में जो आया किया कब फ़िक्र की ईमान की,
क्यूँ कलेजा मुँह को है ले क़त्ल का दिन आ गया
देख ले ये ही हक़ीक़त है .........यहाँ इन्सान की ।..
Urmila Madhav
8.4.2016

Friday, 6 April 2018

दर पे जाते थे

Mareez-e-ishq the har roz uske dar pe jaate the,
Taras khaa kar hamen do boond usne zahr ki dediiN,
::
मरीज़-ए-इश्क़ थे हर रोज़ उसके दर पे जाते थे,
तरस खा कर हमें दो बूंद उसने ज़ह्र की दे दीं...
उर्मिला माधव..
7.4.2017..

Thursday, 5 April 2018

क़ातिल हो गया

हमनवा ही अपना क़ातिल हो गया,
गैर की  दुनियां में शामिल हो गया,
दिल संभलना चाहता है वक़्त पर,
जाने कब ये सबसे आदिल हो गया.....
उर्मिला माधव
5.4.2015

Wednesday, 4 April 2018

सब्र

जब कलेजे से खूं निकलता हो,
काम तब ...सब्र से लिया जाए...
उर्मिला माधव...
4.4.2016

हर बार मैं

क्या है ख़ूबी बता तेरे किरदार में?
देखियो,चारागर क्या हूं बीमार मैं?

न तो नज़ला है और न तपैदिक मुझे,
क्यों भला तुझको पूछूँ भी हर बार मैं?
उर्मिला माधव,
4.4.2017.

Monday, 2 April 2018

दोहा

एक बिंदु पर आप सब,करलें गहन विचार,
प्रेम तो केवल प्रेम है,....इसमें जीत न हार
उर्मिला माधव...
3.4.2015....

आख़री नुकसान है1

ग़र निशाने पर वफ़ा के सिर्फ अपनी जान है,
बस समझना ज़िन्दगी का  आखरी नुक्सान है,
#उर्मिलामाधव ....
3.4.2015

ग़म गुसारी

"Aik she'r"
------------
ज़िन्दगी करती न हरगिज़ ग़म गुसारी,
एक दिन हल्का तो एक दिन ख़ूब भारी ...
उर्मिला माधव....
zindagi kartii n hargiz.....gamgusaarii,
ek din halkaa to ek din khoob bhaarii....
Urmila Madhav
3.4.2015..

Sunday, 1 April 2018

नाज़ है

जिस मुहब्बत पर गुरूर-ओ-नाज़ है,
टूटता है रोज़ ...........ये वो साज़ है....
उर्मिला माधव....
2.4.2014..

नहीं होना

साथ रहते हैं साथ ..देते नहीं,
यूँ भी होता है होके नईं होना....
उर्मिला माधव..
2nd April 2015...

बिता देते हैं

लोग गफ़लत में बहुत उम्र बिता देते हैं,
अपने जज़्बों को बहुत ख़ूब सज़ा देते हैं,

हमसे दिलदार ही दुनियां में धुआं होके भी,
खाक़ लेते हैं ज़मीं पर से, उड़ा देते हैं,

ग़म ख़ुशी,मौत दुआ और हजारों मसले,
कुछ भी लिखते हैं हथेली पै,मिटा देते हैं,

बात का रंग,ज़ुबां शीरीं,शहद के माफ़िक,
अपने लफ़्ज़ों में मिला कर ही दुआ देते हैं,

वक़्त आता है जबीं छू के निकल जाता है,
हम ज़माने को फ़क़त हंस के दिखा देते हैं,
#उर्मिलामाधव ...
1.4.2015...

एक शेर

मैंने कर ली थीं दूरियां क़ायम
दूर रहना ही बस मुनासिव था.  ....
#उर्मिलामाधव ...
1.4.2015