जबसे हुआ बिछोह तुम्हारा,,तब ही से हम सोये नहीं हैं, स्वयम अश्रु धारा बहती है, राम कसम हम रोये नहीं हैं, दुविधाओं ने जीवन घेरा,.......स्थित प्रज्ञ हुआ मन मेरा, कंटक जाल नियति ने सौंपे,....अपने हाथों,बोये नहीं हैं.. उर्मिला माधव .. 18.3.2017
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