एकतरफ़ा प्यार का करते भी क्या, बे-वफ़ा के नाम पे ...मरते भी क्या? हम ..जमा ख़ाते में रख्खे थे अबस, मुफ़्त झूठी आह तब भरते भी क्या.. उर्मिला माधव.. 31.3.2017
No comments:
Post a Comment