मेरी भाषा नहीं,गलतियां हो सकती हैं... _/\_ ------------------------------------------------------
हो गइल मसान..देहिया, कान रहल सब सनेहिया, सुगना....फरार हो गईल, छोड़-तोड़...सबके नेहिया …. उर्मिला माधव... 22.3.2014...
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