दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी, भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री, अँखियाँ बहावें नीर,मनुआँ धरे न धीर, नित्य प्रति थोड़ो सो घटे बस चाव री... उर्मिला माधव, 9.3.2017
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