बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए, फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए, बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर, बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए. उर्मिला माधव.... 21.3.2013...
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