Wednesday, 7 March 2018

बयां हो तो कैसे हो

दिल में हुज्जूम-ए-ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द .....अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में ..........वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये .....ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुर्दार हो चुके हैं .............इबादत के वलवले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ .....हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013

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