एक क़ता------ ---------------- आख़िरश ये जिस्म भी कितना सँवारा जाएगा, और कहाँ तक इसको शीशे में उतारा जाएगा, इसकी हस्ती कुछ नहीं .बस इन्तिहाई ख़ाक है, एक दिन काँधों पै रख कर ये ख़ुदारा...जाएगा' उर्मिला माधव... 30.3.2015
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