Monday, 5 March 2018

देखते नहीं हैं अब

ख़्वाब हम   देखते नहीं हैं अब,
जां कहीं और हम कहीं हैं अब,
पहले उड़ते थे    आसमानों में,
ख़ास ये है के बस यहीं हैं अब,
#उर्मिलामाधव ...
6.3.2015....

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