क्यूँ बनाते हैं कोई घर हम यहाँ, छूट जाना ही तो है ये सब जहाँ , रोना धोना हँसना गाना बे-सबब, साँस ये थम जाये जाने कब कहाँ उर्मिला माधव 30.3.2013
No comments:
Post a Comment