दे दिया है दिल तुम्हें हरदम दुखाने के लिए,
पर इजाज़त दी नहीं है..लौट जाने के लिए .....
उर्मिला माधव...
31.3.2014....
Friday, 30 March 2018
दिल दुखाने के लिए
जागीर ले ली है ?
उलाहना दे रहे हो,यार तुम तो हद करो हो,बस,
मुहब्बत हो गई तुमसे तो क्या जागीर ले ली है?
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Ulahan'a de rah'e ho yaar tum to had karo ho bas,
Muhabbat ho gai'i tums'e to kya jaagiir le lii hai ?
Urmila Madhav....
31.3.2016
सुख़न ज़िंदा नहीं रहता
Hasad ke baar se dab kar koi shayar nahi uttha,
Ye aisi aag hai,jis-se sukhan zinda nahin rahtaa..
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हसद के बार से दब कर कोई शायर नहीं उट्ठा,
ये ऐसी आग है जिससे,सुखन ज़िंदा नहीं रहता,.....
Urmila Madhav..
31.3.2016
करते भी क्या
एकतरफ़ा प्यार का करते भी क्या,
बे-वफ़ा के नाम पे ...मरते भी क्या?
हम ..जमा ख़ाते में रख्खे थे अबस,
मुफ़्त झूठी आह तब भरते भी क्या..
उर्मिला माधव..
31.3.2017
Thursday, 29 March 2018
छूट जाना है
क्यूँ बनाते हैं कोई घर हम यहाँ,
छूट जाना ही तो है ये सब जहाँ ,
रोना धोना हँसना गाना बे-सबब,
साँस ये थम जाये जाने कब कहाँ
उर्मिला माधव
30.3.2013
ख़ुदारा जाएगा
एक क़ता------
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आख़िरश ये जिस्म भी कितना सँवारा जाएगा,
और कहाँ तक इसको शीशे में उतारा जाएगा,
इसकी हस्ती कुछ नहीं .बस इन्तिहाई ख़ाक है,
एक दिन काँधों पै रख कर ये ख़ुदारा...जाएगा'
उर्मिला माधव...
30.3.2015
छोड़ दी
एक शेर....
बारहा उसने उड़ाया जब मुहब्बत का मज़ाक़,
बस तवक़्क़ो उसकी जानिब उम्र भर को छोड़ दी...
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Baarh'a usne uday'a jab muhabbat ka mazaq,
Bas tavaqqo uski janib umr bhar ko chhod di'i
Urmila Madhav..
30.3.2016
चलती है
Zindagi ......roz rang badalti hai,
Chalne waale ke sath chalti hai,
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ज़िंदगी ...रोज़ रंग बदलती है,
चलने वाले के साथ चलती है...
उर्मिला माधव,
30.3.2017
करता है
मजलूम के दिल की तड़पन को एक बार कभी तो जाके सुनो,
वो ख़ुदकुश है,ख़ुद मैय्यत है, ख़ुद ज़िक्र नहीं बस करता है
Majloom ke dil ki tadpan ko,ek baar kabhi to jaake suno,
wo khudkash hai,khud maiyyat hai,khud zikr nahin bas karta hai..
उर्मिला माधव...
30.3.2016
Tuesday, 27 March 2018
ख़ुमारी है
Aaj kii raat kitnii bhaarii hai
Sirf ye baith kar guzaari hai
Niind aatii hai par nahin aatii
Aankh bojhil hai or khumari hai
Urmila Madhav...
28.3.2014..
जलके रहते हैं
हसद का और लहद का फ़र्क़ भी मालूम रखना है,
हसद में जलके रहते हैं.....लहद में दब के रहते हैं..
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Hasad ka or lahad ka farq bhi maaloom rakhna hai,n,
Hasad men jalke rahte hain,lahad men dab ke rahte hain.
उर्मिला माधव,
28.3.2017
Monday, 26 March 2018
जड़ी लगती है
सबकी तक़दीर सितारों से जड़ी लगती है,
अपनी सुनसान चनारों में पड़ी लगती है.......उर्मिला माधव..
27.3.2013
ग़म शनास होते हैं
लोग कुछ यूँ भी ख़ास होते हैं,
वक़्त पर ग़म शनास होते हैं,
उनसे उम्मीद क्या करे कोई,
जो महज़ ख़ुद के पास होते हैं....
उर्मिला माधव...
27.3.2016
Sunday, 25 March 2018
मक्कार हैं
दोबारा--- :)
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कल तलक हम सोचते थे हम बहुत बदकार हैं,
और मुहब्बत के जहाँ में......बारहा मक्कार हैं,
पर ज़रा जब गौर से देखा....तो ये आया नज़र,
एक से बढ़कर एक हैं,हम बे-वजह ग़मख़्वार हैं...
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kal talak ham sochte the,ham bahut badkaar hain,
or muhabbat ke jahan main baaraha makkar hain,
par zaraa jab gaur se dekha..........to ye aaya nazar,
ek se badhkar ek hain,ham be-vajh gamkhwaar hain
#उर्मिला माधव...१४.१२.२०१३..
ख़त लाइये
कौन इसकी फ़िक्र करता है भला बतलाइये,
गोकि मेरे दर तलक भी आइये, .मत आइये,
इक वफ़ा के रंग-ओ-बू से आप हैं खाली अगर,
क्या-म-आनी हैं लहू से रंग के भी ख़त लाइए....
#उर्मिलामाधव ....
26.3.2015...
Friday, 23 March 2018
होली
टोलियों के ........टुकड़े होके रह गए,
काले-काले .......मुखड़े होके रह गए,
अब ज़ियादः और फिर होता भी क्या,
लोग ........अपने दुखड़े रोके रह गए....
उर्मिला माधव...
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toliyon ke ......tukde hoke rah gaye,
kaale kaale mukhde hoke rah gaye,
Ab ziyadah or phir ..hota bhii kyaa,
log .....apne dukhde roke rah gaye,
Urmila Madhav...
24.3.2016
जारी रखें
ज़िंदगी एक जंग है,जारी रखें,
तीर तो हर सम्त से आने ही हैं...
Zindagi ek jang hai,jaarii rakhen,
Teer to har samt se aane he hain..
उर्मिला माधव,
24.3.2017
Thursday, 22 March 2018
आज़ाद हो
अगर ग़लती ही करनी है करो,आज़ाद हो,लेकिन,
पलट कर लौट आने का कोई रस्ता बचा रखना।।।
Agar galati hi karni hai karo,aazaad ho,lekin,
Palat kar laut aane ka koii rastaa bachaa rakhna..
Urmila Madhav
23.3.2016
किन्नरों के वेश में..
ये सभी प्राणी......अनेकों देश में,
जी रहे हैं.......किन्नरों के वेश में,
नाचते गाते हैं.......औरों के लिए,
जो स्वयं रहते कठिन परिवेश में....
उर्मिला माधव...
23.3.2014....
Wednesday, 21 March 2018
मसान देहिया
मेरी भाषा नहीं,गलतियां हो सकती हैं... _/\_
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हो गइल मसान..देहिया,
कान रहल सब सनेहिया,
सुगना....फरार हो गईल,
छोड़-तोड़...सबके नेहिया ….
उर्मिला माधव...
22.3.2014...
ठहरी रही हैं
जिन दरख्तों की जड़ें गहरी रही हैं,
आँधियों के बाद भी...ठहरी रही हैं....
उर्मिला माधव...
22.3.2014...
मयस्सर नहीं हुआ
फिरते रहे हैं आपकी दुनियां में दर -ब-दर,
छोटा सा आशियाँ भी, मयस्सर नहीं हुआ..
उर्मिला माधव..
22.3.2017
तिलिसमात आदमी
जिंदा जला रहा है कोई ज़िन्दगी मगर,
मुर्दे में खोजता है तिलिस्मात आदमी.....
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zinda jalaa rahaa hai koii zindagi magar,
murde main khojtaa hai,tilismaat aadmii....
#urmilamadhvav
21.3.2015...
समर्पण
बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
21.3.2013...
Monday, 19 March 2018
Saturday, 17 March 2018
पाए गए
हमने अपनी खूबियां भी तौल दीं मीज़ान पर,
जब हज़ारों रंजिशों से ....हम घिरे पाये गए,....
#उर्मिलामाधव...
18.3.2015..
सोए नहीं हैं
जबसे हुआ बिछोह तुम्हारा,,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रु धारा बहती है, राम कसम हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा,.......स्थित प्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे,....अपने हाथों,बोये नहीं हैं..
उर्मिला माधव ..
18.3.2017
Friday, 16 March 2018
कुंडलिया छंद
कुण्डलिया छंद ---पहली कोशिश...
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क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग...
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
17.3.2014..
पानी-पानी हो गया
जब से उसने छू दिया सागर की छोटी बूंद को,
बस उसी दम ये मेरा दिल पानी-पानी हो गया....
#उर्मिलामाधव....
16.3.2015....
Wednesday, 14 March 2018
नया प्यार
एक नया ....रोज़ प्यार है जिनका,
आशिक़ी .......रोज़गार है उनका,
हमने .....उनसे भी लड़ते देखा है.
जिन पे ...दार-ओ-मदार है इनका
उर्मिला माधव...
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ek nayaa .......roz pyar hai jinka,
aashiqi ...........rozgaar hai unka,
maine unse bhi ladte dekha hai,
jin pe ...daar-o-madaar hai inka....
Urmila Madhav...
15.3.2016
Monday, 12 March 2018
दुहाई है-- क़ता
वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है,
मेरे हिस्से मैं फ़क़त रुसवाई है दुहाई है,
चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा,
चांदनी चलके यहाँ तक आई है दुहाई है,
उर्मिला माधव...
13.3.2014..
हैरान करदे
ये मर्ग-ए-बशर सा ही एहसास क्यूँ है,
कभी ज़िन्दगी .....तू भी हैरान कर दे,
उर्मिला माधव,
13.3.2017
Sunday, 11 March 2018
हाल कहते हैं
जहाँ इंसान को मछली,ऑ घर को जाल कहते हैं,
बड़ी हैरत है अपने मुंह से अपना हाल कहते हैं,
उर्मिला माधव
पहाड़ों सी दूरी
हमारी ताबानी देखो,कभी तुम रु-ब-रु आकर,
वगरना आँख से ओझल की दूरी है पहाड़ों सी.....
उर्मिला माधव,
12.3.2016
गाली दे गए मुँह पर
हज़ारों मील की दूरी से जो उल्फ़त जताते थे
ज़रा नज़दीक आते ही वो गाली दे गए मुंह पर ...
उर्मिला माधव
12.3.2017
Saturday, 10 March 2018
ज़ख़्म को चलता नहीं किया
जो जिस तरह से आया उसे जज़्ब कर लिया,
मैंने किसी भी ज़ख़्म को चलता नहीं किया..
उर्मिला माधव
11.3.2018
याद दिलाया है अभी
तुमने एक शख्स मुझे याद दिलाया है अभी,
उसकी तर्ज़ों को यहीं गा के सुनाया है अभी,
मुझको दरक़ार है कुछ वक़्त सँभलने के लिए,
उसकी यादों ने बहुत मुझको रुलाया है अभी.....
#उर्मिलामाधव ...
11.3.2015...
अनादारी
जिनका हर रंग था अनादारी...
वो ही बिछते हैं अब गलीचों से
––––
Jinka har rang tha anaa daari..
Wo hii bichhte hain ab galiichon se..
Urmila Madhav...
11.3.2016
कुछ नहीं जनाब
लो उन्सियत न हमको ज़माने से अब रही,
ग़ैरों की जुस्तजू का सबब कुछ नहीं जनाब...
उर्मिला माधव...
11.3.2017
Friday, 9 March 2018
बुड़बक
=D
हम तुम्हारे प्यार में.....मरने चले थे,
कैसे बुड़बक थे कि क्या करने चले थे ... :(
उर्मिला माधव...
10.3.2014..
संघर्ष किया
निवृतियों की इच्छा रखकर,....जीवन भर संघर्ष किया,
इसका कुछ अनुमान नहीं है,कितना-कितने वर्ष किया,
#उर्मिलामाधव...
10.3.2015...
फ़क़ीरों की शक़्ल में
दरिया में हम खड़े थे,....जज़ीरों की शक्ल में,
और ख़ुद से हम लड़े थे फ़क़ीरों की शक्ल में...
उर्मिला माधव...
10.3.2015
Thursday, 8 March 2018
मंच है
🙂🙂🙂🙂
आपके हाथों में...ग़र कोई मंच है.
आपकी किस्मत समझ लो टंच है
अच्छे अच्छे ...सामने झुक जायेंगे,
ये क़ता है और..महज़ एक पंच है....
उर्मिला माधव...
9.3.2017
मुक्तक
दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी,
भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री,
अँखियाँ बहावें नीर,मनुआँ धरे न धीर,
नित्य प्रति थोड़ो सो घटे बस चाव री...
उर्मिला माधव,
9.3.2017
Wednesday, 7 March 2018
जताया जाएगा
mahila divas ke naam---
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आज "महिलाओं" को माथे पर बिठाया जायेगा,
ख़ास ये है ...एक दिन सब कुछ जताया जाएगा,
सब जमा खर्चे,ज़बानी,.....हर जगह होंगे नमूद,
फिर कहे लफ़्ज़ों को धो-धो कर मिटाया जाएगा,
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aaj mahilaon ko .......maathe par bithaayaa jaayegaa,'
khaas ye hai ..........ek din sab kuchh jataaya jaayegaa,
sab jamaa kharche zabaani,har jagah honge namood,
phir, kahe lafzon ko .dho-dho kar mitaya jaayegaa....
#उर्मिलामाधव ...
8.3.2016...
बयां हो तो कैसे हो
दिल में हुज्जूम-ए-ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द .....अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में ..........वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये .....ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुर्दार हो चुके हैं .............इबादत के वलवले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ .....हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013
Monday, 5 March 2018
परस्तार हुए
ऐसी नज़रों के परस्तार हुए,
जिस्मों जाँ दोनों तार-तार हुए,
आज दिल ये सवाल करता है,
बे सबब ऐसे क्यूँ निसार हुए,
फूल बन कर क़रीब आए थे,
दूर जाके वो कैसे ख़ार हुए,
लोग कहते हैं तजुर्बा अक्सर,
नादाँ दिल ना किसीके यार हुए।।
उर्मिला माधव..
6.3.2013
कम नहीं होता
हज़ारों चोट लगने पर भी पत्थर नम नहीं होता,
बहुत सी कोशिशों पर भी तिरा ग़म कम नहीं होता.
उर्मिला माधव.
6.3.2013
सब्ज़ होते हैं
बुजुर्गों की मुहब्बत के सहारे सब्ज़ होते हैं,
हमेशा मुश्किलों के वक़्त वो महसूस होते हैं,
ख़ुशी होती है,गर शादाब बेलें लहलहाती हैं,
शजर के साये, उनके वास्ते,मह्फूज़ होते हैं,
उर्मिला माधव...
6.3.2014...
सब्ज़---हरे
शादाब---हरा-भरा
शजर---पेड़
मखसूस--- particular ख़ास
देखते नहीं हैं अब
ख़्वाब हम देखते नहीं हैं अब,
जां कहीं और हम कहीं हैं अब,
पहले उड़ते थे आसमानों में,
ख़ास ये है के बस यहीं हैं अब,
#उर्मिलामाधव ...
6.3.2015....
Sunday, 4 March 2018
दर्द-ए-ग़म
दिल के हालात हम छुपाते हैं,
इसलिए.....खूब मुस्कुराते हैं,
दर्द-ए-गम ओढ़नी से ढकते हैं
छुप के....कोने में बैठ जाते हैं,
उर्मिला माधव...
5.3.2014...
होली
मुझको होली ख़राब लगती है,
सच तो ये है,अज़ाब लगती है,
दिल तो मिलते नहीं हैं लोगों के,
झूठ का इक नक़ाब लगती है.....
#उर्मिलामाधव ...
5.3.2015
निसबतें
मेरी सबसे पसंदीदा रचनाओं में से एक
हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और खिलवतें.
उर्मिला माधव
5.3.2016
Saturday, 3 March 2018
शेर
तुमको देखा तो अचानक ये ख़याल आया मुझे,
ज़िन्दगी की रहगुज़र में ....तुम भी मेरे साथ थे,
उर्मिला माधव...
4.3.2016