Sunday, 31 December 2017

क़ता

एक क़'ता

इश्क़  के जुमले सुने और आसमां में उड़ गए,
जिस जगह जाना नहीं था,वो ही रस्ता मुड़ गए...
दिल हुआ जब बदचलन,अच्छा बुरा सोचा नहीं,
अपनी दुनियाँ भूल कर जाने कहाँ पर जुड़ गए.....
उर्मिला माधव...
1.1.2015....

क़ता

नया साल मुबारक ...
सर्द शोले हैं,....सर्द मौसम है,
ज़िन्दगी चाहती बहुत कम है,
बस ये दुनियां हरी-भरी करदे,
कुल ज़माने का तू मोहतरम है...
उर्मिला माधव ...
1.1.2016

Saturday, 30 December 2017

नया साल

ये मरा वाट्सऐप। ......मुसीबत है,
इसमें लोगों को कितनी फुरसत है,
फोर ए ऐम पर। .....शूरू हो कर ,
शब-ब ए-खैर तक से  नि स्बत है....
अब नया साल। ...इसमें चस्पां है,
उफ़ जवाबों की किसमें हिम्मत है....
उर्मिला माधव। ..
31 दिसंबर 2016

Friday, 29 December 2017

क़ता

वेदना के स्वर मुखर होने लगे सब,
शून्य से थे क्यूँ प्रखर होने लगे अब ??
हम ह्रदय पाषाण वत...रखते रहे हैं,
टूट कर गिरते शिख्रर होने लगे कब ??
उर्मिला माधव...
३०.१२.२०१३...

एक शेर

एक शेर...
एक दिन बरसात में जो आँख उसने बंद की,
फिर कभी सोचा नहीं जंगल दहकते हैं कहीं,
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Ek din barsaat main jo..........aankh usne band kii,
phir kabhi socha nahin,jangal dahkte hain kahiin...
उर्मिला माधव...
३०.१२.२०१३..

क़ता

किसकी फुरक़त यूँ आज भारी है,
दर्द-ए-ग़म बे-हिसाब......तारी है,
होगी सुबहा तो......देखा जाएगा,
शब्-ए ग़म किस तरह गुज़ारी है...
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kiski furqat yun aaj bhaari hai,
dard-e-gum be hisab taari hai,
Sahar hogi to dekha jaayega,
Shub-e-gum kis tarah guzaari hai...
Urmila Madhav..
३०.१२.२०१३

एक शेर

किस-किसके हासिलात पै हलकान रहोगे,
बदरंग हो चुकी है ..ज़माने की शक्ल अब....
उर्मिला माधव....
30.12.2014....

एक शेर

रोके ही फूटती हैं बस आँखें,
पेड़ से टूटती हैं ...जब शाखें,
खोल कर मेरे हाथ मत देखो,
इससे बस छूटती हैं अब राखें...
#उर्मिलामाधव
30.12.2015

एक शेर

सांस भत्ते में मिली ....जद्दोजेह्द का बार भी,
इक गुज़ारेदार महंगी ज़िन्दगी जीता भी क्या...
उर्मिला माधव..
30.12.2016

Thursday, 28 December 2017

एक शेर

सबकी पेशानी पे ........चस्पां हो गए फ़ख्र-ओ-गुरूर
हम बिना नाम-ओ-निशाँ छाना किये दुनियां की ख़ाक,
उर्मिला माधव...
29.12.2016

एक शेर

बिन जुबां खोले सज़ा दे जायेंगे,
रास्ते के कंकरों से मत उलझना...
उर्मिला माधव...
28.12.2016

एक शेर

अक्स उनका रात-दिन हलकान करता था हमें,
हम इधर मानिंद-ए-शम्मा हर नफ़स जलते रहे,
उर्मिला माधव...
28.12.2016

Tuesday, 26 December 2017

शेर

अब आपको ज़मीन पर ....जन्नत दिखाएँगे,
हम अपनी माँ के हाथ का एक ख़त दिखाएंगे...
उर्मिला माधव....
27.12.2014..।

क़ता

दिल में सब्र-ओ-क़रार ..कम ही सही,
जज़्बा-ए-इख़्तियार ......कम ही सही,
उस पे दामन में तार .....कम ही सही,
गुल-ओ-चमन-ओ-बहार कम ही सही
शुक्र है फ़िक्र तेरे बिन तो हूँ,
ख़ूब है ख़ुद से मुत्मइन तो हूँ...
उर्मिला माधव...
27.12.2016

Monday, 25 December 2017

मतला

बे-वफ़ा दोस्त को ग़र दिल से भुलाया जाए,
बाद फिर उसके कोई ग़म न मनाया जाए....
26.12.2014...

०००००

एक जुगनू था,शह्र अनजान था,
उसको उड़ना था मगर हलकान था,
किस जगह पर सांस ले,बैठे कहाँ,
और क़दम बोसी करे,किसकी कहाँ,
फिर भी आख़िर वो क़दम भी चुन लिए,
जिनमें अपने ख़्वाब जाकर बुन लिए,

शेर

दुआ सलाम, ग़ुलामी के रंग में हो अगर,
ये वो सज़ा है के मुझसे क़ुबूल होती नहीं....
उर्मिला माधव...
26.12.2016..

Sunday, 24 December 2017

शेर

अब रूह के सहारे ...चलते हैं हम ज़मीं पर,
एक जिस्म था,कभी का छलनी हुआ पड़ा है..
उर्मिला माधव,
25.12.2016

Saturday, 23 December 2017

शेर

दिल कभी ज़्यादः दुखा बस रो लिए, चुप होगये,
ग़म सुलग कर बुझ गये और हम धुंए में खो गए ...
उर्मिला माधव...
24.12.2014...

Tuesday, 19 December 2017

क़ता

मिलोगे ग़र जो मुफलिस से तो जानोगे फ़िक़र क्या है!!
किसी आशिक़ से मिल लोगे तो जानोगे जिगर क्या है!!
बहुत बेबाक़ सोता है..............बिछा कर टाट रस्ते मैं,
किसी दरवीश से मिलना तो जानोगे....कि ज़र क्या है!!
उर्मिला माधव...
२०.१२.२०१३.

क़ता

लफ्ज़ कुछ इस तरह कहे जाते,
बात ही बात में .......छले जाते,
हमको मंज़ूर ...हर कमी होती,
आपके ....साथ हम चले जाते.....
उर्मिला माधव....
20.12.2014...

Sunday, 17 December 2017

शेर

hamen haar jaane kii aadat thii itnii,
huii jiit haasil to ghabraa gaye ham,
::
हमें हार जाने की आदत थी इतनी,
हुई जीत हासिल तो,घबरा गए हम.....
#उर्मिलामाधव...
18.12.2015

ग़ज़ल

ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी ,फ़ज़ा अजनबी सी,

ye dil dhundhta hai jaghaa ajnabii sii,
hawaa ajnabii sii fazaa ajnabii sii

कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना,
के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना,
ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो,
कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो,

kabhii zindagi main ye din bhi dikhaana,
ke har samat ik ajnabii rang laanaa,
zamiin ajnabii,aasmaan ajnabii ho,
koi shakhs ho ru-b-ru, ajnabii ho,

लगे जिसकी हर इक अदा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी.....

lage jiski har ik adaa ajnabii sii,
hawa ajnabii sii fazaa ajnabii sii,

हथेली पे हों नाम कुछ अजनबी से,
पढ़े ही न जाएँ,पढ़ें हम कहीं से,
के हर एक इन्सान ही ,अजनबी हो,
सुनो मुख़्तसर,कुल जहां अजनबी हो,

hatheli pe kuchh naam hon ajnbi se,
padhe hii n jaayen,padhen ham kahin se
ke har ek insa,an hi ajnabi ho,
suno mukhatsar,kul jahaan ajnabi ho,

मिले दर्द-ए-दिल को दवा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी...

mile dard-e-dil ko dawaa ajnabii sii,
hawaa ajnabii,ho fazaa ajnabii sii...
#उर्मिलामाधव.....

शेर

जहान-ए-जुनूं का यही फ़लसफ़ा है,
जियो ज़िन्दगी को,अनां से फना तक...
उर्मिला माधव..

क़ता

दुनियां तो चारागर किसीकी नहीं,
मुझको परवाह पर किसीकी नहीं,
कितना अच्छा है तीरगी से रसूख,
ये चमक उम्र भर ...किसीकी नहीं...
उर्मिला माधव,
18.12.2016

Wednesday, 13 December 2017

क़ता

दोबारा---
=====
कल तलक हम सोचते थे हम बहुत बदकार हैं,
और मुहब्बत के जहाँ में......बारहा मक्कार हैं,
पर ज़रा जब गौर से देखा....तो ये आया नज़र,
एक से बढ़कर एक हैं,हम बे-वजह गमख्वार हैं...
kal talak ham sochte the,ham bahut badkaar hain,
or muhabbat ke jahan main baaraha makkar hain,
par zaraa jab gaur se dekha..........to ye aaya nazar,
ek se badhkar ek hain,ham be-vajh gamkhwaar hain
उर्मिला माधव...१४.१२.२०१३..

Tuesday, 12 December 2017

शेर

दुनियां की दोस्ती हो या आशिक़ी की चाहत,
हर बात से है बढ़कर,अतफ़ाल की मुहब्बत....
::
Duniyan ki dosti ho ya aashiqi ki chahat,
Har baat se badhkar atfaal ki muhabbat
#उर्मिलामाधव
13.12.2015...
अतफ़ाल--बच्चे

Wednesday, 6 December 2017

शेर

आशिक़ों के दिल जहाँ मैं जब निचोड़े जायेंगे,
सबसे आगे दर्द  के क़तरे निकल कर आयेंगे,
उर्मिला माधव..
aashiqon ke dil jahaan main jab nichode jaayenge,
sabse aage........khoon ke qatre nikal kar aayenge..
Urmila Madhav...
7.12.2013...

शेर

नहीं चाहा कभी मैंने ......के मेरी बादशाहत हो,
तमन्ना सिर्फ इतनी थी के मेरे दिल को राहत हो,
::
Nahi chaha kabhi maine ke meri baadshahat ho,
Tamanna sirf itni thi ke mere dil ko raahat ho
#उर्मिलामाधव....
7.12.2015.

शेर

बरसरे बज़्म लो उस ने सलाम भेजा है,
ये ख़बर है ही नहीं किसके नाम भेजा है....
उर्मिला माधव...
7.12.2016

Tuesday, 5 December 2017

शेर

कितनी दबीं हैं रूहें ज़मीन-ए-जहान में,
रखते हैं पाँव खाक़ पे सौ बार देख कर.....
kitni dabiin hain roohen zamin-e-jahaan main,
rakhte hain paanv khaaq pe sau baar dekh kar...
उर्मिला माधव..
6.12.2013.

क़ता

चल.......तेरा एहतराम करती हूँ
तेरी ख़ातिर.....ये काम करतो हूँ
दिल मेरी मिलकियत है, रहने दे,
कुल जहां......तेरे नाम करती हूँ....
उर्मिला माधव...
6.12.2014....

क़ता

लोग.....इंसाफ़ क्यूँ नहीं करते,
गलतियां .माफ़ क्यूँ नहीं करते,
सबकी इक ज़ात सिर्फ़ इंसां है
बात ये ...साफ़ क्यूँ नहीं करते,
उर्मिला माधव...
6.12.2014..

शेर

मुझको तक़दीर ने कितना भी बदल डाला है,
पर मेरे ग़म का सफ़र फिर भी बहुत आला है,
उर्मिला माधव,
6.12.2016

Monday, 4 December 2017

शेर

शैख़ जी अब आप भी इस बार रोके जाएंगे,
गलतियों के नाम पर हर बार टोके जाएंगे
उर्मिला माधव

Sunday, 3 December 2017

शेर

बस लहू लिखती रहीं हैं उँगलियाँ ये उम्र भर,
चश्मे गिरियां से मुहब्बत लिख नहीं पाये कभी

शेर

क्यूँ मुहब्बत और सुकूं में ....आपसी रिश्ता नहीं,
किस तरह का दर्द है के है भी और दिखता नहीं,
उर्मिला माधव....
4.12.2014...

क़ता

अपनी आँखों का फ़क़त नूर बना कर रखलो,
जाँविदा इश्क़ का.....दस्तूर बना कर रखलो,
अच्छा रहने दो चलो छोड़दो अपनी सी करो,
मुझको दिनरात का मजदूर बना कर रख लो...
#उर्मिलामाधव...
4.12.2015

Saturday, 2 December 2017

शेर

कितनी सारी बाज़ियां हम जीत कर होते हैं ख़ुश,
ज़िन्दगी की  आख़री बाज़ी .......कोई जीता नहीं .......
उर्मिला माधव....
3.12.2014.....

मुक्तक

बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
3.12.2014...

पारा पारा हो गया

जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव...
3.12.2016

क़ता

हमने तौले है पंख मुश्किल के,
अपनी ग़ैरत कहीं न झांकी है,
ज़िन्दगी भर के,ये ताजरिबे हैं
मुफ़्त कोई धूल नहीं फांकी है...
उर्मिला माधव..
3.12.2016

शेर

Jab talak thi zindagi,qabiz rahe duniyan ke log,
Maut ne aakar sabhi qisse baraabar kar diye..

जब तलक थी ज़िंदगी, क़ाबिज़ रहे दुनियां के लोग,
मौत ने आकर सभी .........हिस्से बराबर कर दिए...
उर्मिला माधव..
3.12.2016

Qata

कितने सारे। ...दर्द समेटे फिरता है,
दिल में आहें। ..सर्द समेटे फिरता है,
जब चाहे तब दुनियां अपनी रच डाले
बेमतलब की। ..गर्द समेटे फिरता है
उर्मिला माधव

Friday, 1 December 2017

एक मतला दो शेर

चराग़ बुझने लगे,नींद अब कहाँ है बता,
न जाने कब से मेरी आँख दे रही है सदा,

कहाँ सुकून,कहाँ ज़ब्त औऱ ये ख़ामोशी,
हयात कब से मुझे यूँ ही दे रही है सज़ा,

क़यास-ए-कल्ब मेरा और अदा ज़माने की,
ये तीरगी भी फ़क़त ग़म को दे रही है हवा,

क़ता

कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
2.12.2016