Saturday, 17 January 2026

हम तो कितनी बार गए हैं

हम तो कितनी बार गए हैं, उसके घर के दरवाज़े तक,
वो ही कभी न आया फिर के अपने किये हुए वादे तक..

दर्द में पिन्हा होकर भी बस खामोशी से देखा सब कुछ,
ख़ुद को हमने क़सम दिलाई, नहीं टूटना ग़म साधे तक..
उर्मिला माधव

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