Sunday, 25 January 2026

शेर ओ सुखान

शेर-ओ-सुखन का रंग भी कितना अजीब है,
रहते हैं सब ज़मीं पै मगर आसमां लिखें,
दिल रंजगर ऑ आँख में आंसू भी ख़ूब हैं,
जलती हुई क़लम से मगर शादमां लिखें.....
उर्मिला माधव...
शादमा / ख़ुश

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