ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 1 January 2026
दुनिया देखी है
पैरों पे चल कर ही दुनियां देखी है,
इक-इक ईंट गिनी है हमने राहों की,
चलते चलते मंज़िल भी आ जाती है,
चाहत फ़िर क्यूं होगी हमें पनाहों की,
उर्मिला माधव
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