Thursday, 3 November 2022

जीना होगा

उससे बिछड़े तो यही देर तक सोचा हमने,
बस हमें बैठ कर ऑ सोच कर जीना होगा?
उर्मिला माधव

अहसास

हमने आवाज़ से पहचाना नहीं उसको कभी,
उसका अहसास ही सांसों की तरह चलता है
उर्मिला माधव

उसकी ज़ुल्फ़ों

उसकी ज़ुल्फ़ों की महक आज तक बाक़ी है यहां,
शब यहां जब भी गुज़रती है तो रुक जाती है
उर्मिला माधव

Sunday, 18 September 2022

ज़िन्दगी बेज़ार है

ज़िन्दगी के चार लम्हे बेशक़ीमत थे कभी,
अब उन्हीं लम्हों से मिलकर ज़िन्दगी बेज़ार है...
उर्मिला माधव

Friday, 16 September 2022

बरसात

हमारे शह्र में बरसात काफ़ी हो रही है,
किसीकी याद में वादे सबा ही रो रही है
यहीं मेरा नशेमन है, यहीं बिजली गिरी है
यही ताज़ा ख़बर है, जो रही है सो रही है
उर्मिला माधव

Tuesday, 30 August 2022

महदूद

हमको अपने दायरे महदूद रखना ठीक था,

 'जो' भी हमको रब दिखाना चाहता 'वो' देखते।।
उर्मिला माधव

Wednesday, 24 August 2022

तो?

कोई पैदा हो कोई मर जाए,  तो?
हादसों से ज़िन्दगी डर जाए, तो?
मुश्किलों को किस तरह अंजाम दूँ?
कुल जहां का ग़म मिरे सर जाए तो?
उर्मिला माधव

Monday, 22 August 2022

दिल मिरा रोज़

दिल मिरा रोज़ तुझे छू के गुज़र जाता था,
फिर भी कमज़ोर मुझे कोई अदा कर न सकी
उर्मिला माधव

Tuesday, 31 May 2022

रफ़्ता-रफ़्ता

रफ़्ता-रफ़्ता हम जहां से दूर बिल्कुल हो गए,
हर कोई समझा कि हम मग़रूर बिल्कुल हो गए,

हर नफ़स दुनियां में जब देखा ज़वाल ए रौशनी
फ़ैसला लेने को तब मजबूर बिल्कुल हो गए..
उर्मिला माधव
31 मई 2022

Sunday, 29 May 2022

सबकी ग़ैरत

सबकी ग़ैरत सो गई है......क्या करूँ ?
रूह तक जब रो गई है......क्या करूँ?
दिल नहीं गिनता है अब ऐब-ओ-हुनर,
ज़िद सी इसको हो गई है....क्या करूँ?
उर्मिला माधव....
30.5.2016

Sunday, 1 May 2022

आपा खो दिया

आपकी सांसों की हमने उम्र भर रख्खी ख़बर,
इस मशक्कत में ही हमने अपना आपा खो दिया
उर्मिला माधव

Saturday, 30 April 2022

सजदा किया हमने वहीं

जब जहाँ तबियत हुई सजदा किया हमने वहीँ,
कौन इतना फ़र्क़ करता, घर है या दैर-ओ-हरम,
उर्मिला माधव
30.4.2018

Thursday, 28 April 2022

दौड़ में शामिल नहीं

(कुछ मेरे मन की....)

मैं तो कब से कह रही हूँ बात ये,
मैं किसी भी दौड़ में शामिल नहीं..

बिन हुनर ही हाथ में आ जाए जो,
ये अगर हासिल है तो हासिल नहीं...

- उर्मिला माधव

Thursday, 14 April 2022

सन्नाटों ने घर को

सन्नाटों ने ...घर को आकर घेरा है,
कोने-कोने ......वीरानी का डेरा है,
टूटे-फूटे ख़्वाब पड़े मिल सकते हैं,
फ़िक़्र नहीं है इनका कौन लुटेरा है...
#उर्मिलामाधव...
15.4.2015...

Tuesday, 12 April 2022

राधा रख लिया है

नाम देखो अपना ..राधा रख लिया है,
सच मगर ये है कि आधा रख लिया है,

ये मिलाया जायेगा जब भी तुम्हारे नाम से,
तब पुकारे जाओगे तुम भी तो राधे श्याम से....
#उर्मिलामाधव....
13.4.2015।..

Saturday, 9 April 2022

कश्ती उतारी होती

चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव....
10.4.2015...

हासिल करेंगे अब

उसको मिटाके लोग क्या हासिल करेंगे अब?
जो ज़िन्दगी कभी की मेरी ख़त्म हो गई... 
उर्मिला माधव ......
10.4.2015

हमारे ख़ाब

हमारे ख्वाब भी तनहाई में निखरते हैं,
वगरना भीड़ में तो वक़्त गिनना पड़ता है .
उर्मिला माधव
10 .10 .2017

Monday, 28 March 2022

ज़र्राह

ज़र्राह हमको कहता रहा, टूट जाओगे,
हमको भी मगर ज़िद ही रही, टूट जाएंगे..
उर्मिला माधव

Thursday, 17 March 2022

रंग में हैं

हम अकेले ख़ास अपने रंग में हैं,
यूं बज़ाहिर आप सबके संग में हैं....
उर्मिला माधव..
4.9.2017

Saturday, 5 March 2022

हम चुकाते रह गए

मेरी सबसे पसंदीदा रचनाओं में से एक 

हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और ख़लवतें.
उर्मिला माधव
5.3.2016

Friday, 11 February 2022

हाय दैया

एक मतला तीन शेर,
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कितनी सारी गहमा-गहमी हाय दैय्या,
दुनिया कैसी सहमी-सहमी हाय दैय्या,

प्यार कहाँ पर मिलता है,इस मेले में,
सबकी आँखों में बे-रहमी हाय दैय्या,

जब हमने पहचाना,सबको ठीक नहीं,
क्यूँ हम पालें ये ख़ुशफ़हमी,हाय दैय्या,

क्या पहचान बताऊँ सबको दुनिया की,
सबकी आँखें लगती बहमी,हाय दैय्या,
उर्मिला माधव...
12.2.2014....

ग़म रहेगा

उंसियत मुझको कोई दरकार कब है,
हां मगर जो ग़म है, वो तो ग़म रहेगा,
उर्मिला माधव

बसेरा हो गया

शबनमी अश्कों का पलकों पर बसेरा हो गया,
कुछ ज़ियादा बोझ था, दिन बिन ढले ही सो गया,
उर्मिला माधव

Sunday, 30 January 2022

परेशान कर दिया

दुनिया की हरक़तों ने परेशान कर दिया, 
अपनी तरफ से हमको बयाबान कर दिया, 
हिन्दू कहा हमें तो कभी और कुछ कहा, 
जब दिल हुआ तो हमको मुसलमान कर दिया...
उर्मिला माधव
30.1.2015

Tuesday, 18 January 2022

karishma

ये उसकी तेज़ निगाही का करिश्मा ही सही,
फिर भी क़ाबिज़ न हुआ दिल पे ये मंज़र कोई...

Ye uski tez nigaahii ka karishma hi sahii,
Phir bhi qabiz n hua,dil pe ye manzar koii...
उर्मिला माधव ..
18.1.2016

abhi samjhi kahan hai

अभी संमझी कहाँ तुमने समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2018

अभी संमझी कहाँ

अभी संमझी कहाँ तुमने समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2018

ajab dekhi

झूठ की शक़्ल ही अजब देखी,
ये न बतलाएंगे ....के कब देखी,
ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको,
जो के बे नाम .....बे नसब देखी,
उर्मिला माधव

कल्पनाएँ तो ह्रदय

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी, वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों, किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं?? 
उर्मिला माधव