ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 29 May 2022
सबकी ग़ैरत
सबकी ग़ैरत सो गई है......क्या करूँ ?
रूह तक जब रो गई है......क्या करूँ?
दिल नहीं गिनता है अब ऐब-ओ-हुनर,
ज़िद सी इसको हो गई है....क्या करूँ?
उर्मिला माधव....
30.5.2016
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