ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 28 March 2022
ज़र्राह
ज़र्राह हमको कहता रहा, टूट जाओगे,
हमको भी मगर ज़िद ही रही, टूट जाएंगे..
उर्मिला माधव
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