ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 5 March 2022
हम चुकाते रह गए
मेरी सबसे पसंदीदा रचनाओं में से एक
हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और ख़लवतें.
उर्मिला माधव
5.3.2016
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