ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 11 February 2022
बसेरा हो गया
शबनमी अश्कों का पलकों पर बसेरा हो गया,
कुछ ज़ियादा बोझ था, दिन बिन ढले ही सो गया,
उर्मिला माधव
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