Saturday, 9 April 2022

कश्ती उतारी होती

चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव....
10.4.2015...

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