Friday, 28 February 2020

आईना रखें

उंगली उठाओ गैर पर,आज़ाद हो जनाब,
बेहतर रहेगा रु-ब-रु एक आईना रखो...
Urmila Madhav..
29.2.2016

Thursday, 27 February 2020

दिलकशी करलो

एक मतला----

पैदा,जज़्बों में दिलकशी करलो,
या करो यूँ के ख़ुदकशी कर लो,...
#उर्मिलामाधव....
28.2.2015...

जीने नहीं देती

ख़ामाख़यालियों  में सुलगते हैं जिनके ग़म,
उनको दिलों की आग ही...जीने नहीं देती.....
उर्मिला माधव...
28.2.2017

Wednesday, 26 February 2020

हो गई

ज़िन्दगी भर हम अकेले ही चले हैं राह में,
इसलिए तनहाई से अब दोस्ती सी हो गई.
उर्मिला माधव
27.2.2016

घबरा गए

😊😊😊
एक ज़रा सी बात से वो इस क़दर घबरा गए,
एक पल में तीर और तलवार लेकर आ गए,
-----
उर्मिला माधव
27.2.2016

परवरदिगार तुम

मुझको ये लग रहा है,कहीं आस-पास हो,
कैसे करिश्मा साज़ हो,.परवर दिगार तुम?
उर्मिला माधव,
27.2.2017

Monday, 24 February 2020

लिबास क्यों है


बारिश तो हो रही है सावन उदास क्यूँ है?
तनहाइयों का आलम ही आसपास क्यूँ है?
काली घटा के साये घिर-घिर के आ रुहे हैं,
अब तेरी मुहब्बत का ऐसा लिबास क्यूं है?.....उर्मिला माधव
25.2.2013

मत करना

इतनी ऊंची उड़ान मत करना,
चाह को आसमान मत करना,
 
बात कहना तो वो मुक़म्मल हो,
अपनी झूठी ज़बान मत करना, 

itnii oonchii udaan mat karnaa,
chaah ko aasman mat karnaa,

baat kahnaa to wo muqammal ho,
apnii jhoothii zabaan mat karnaa...
उर्मिला माधव...
25.2.2014..

ग़मगुसारी

ज़िंदगी करती न हरगिज़ ...ग़म गुसारी,
एक दिन हलका तो इक दिन ख़ूब भारी..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

कहाँ आ गए हैं हम

मुश्किल ऑ हादिसात से घबरा गए हैं हम,
ये कौनसा जहाँ है,....कहाँ आ गए हैं हम?
उर्मिला माधव,
24.2.2017

Sunday, 23 February 2020

सुनाई देती है

क्यूँ इतनी गहराई.....दिखाई देती है,
क्यूँ साँसों की आवाज़ सुनाई देती है,
बस ऐसी सूरत ग़ैर मुक़म्मल होजाए,
जो इंसानो को रोज़.....जुदाई देती है... 
उर्मिला माधव...
24.2.2014..

स्वीकार हो शत-शत प्रणाम

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक है इस संसार के शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ...विश्व में महिमा अपार,
मेरा नतमस्तक नमन स्वीकार हो, शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

शत-शत प्रणाम

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक जगत के आपको शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ....विश्व में महिमा अपार,
हो नमन स्वीकार मेरा ...आपको शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

ज़िन्दगी हुज़ूर

मैदान-ए-जंग है ये मेरी ज़िंदगी हुज़ूर,
बेबाक़ होके दिल भी लड़ा जंग-ए-अदावत
उर्मिला माधव
24.2.2018

Saturday, 22 February 2020

कोई

ख़ुद ही खड़े रहे हों जहां हाशिये पे लोग,
फिर और इस जगह से कहाँ जाएगा कोई 
उर्मिला माधव
23.2.2018

Friday, 21 February 2020

रात ही में रात है

दर हकीक़त वक़्त भी पाबंदियों के साथ है,
दिन हुआ दिन में हमेशा,रात में ही रात है,
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

दिखते हैं

लोग जो हुस्न-ओ-इश्क़ लिखते हैं,
मुझको.......दीवाने जैसे दिखते हैं,
सिर्फ़..........शाखें बदलते रहते हैं,
पाँव उनके.........कहीं न टिकते हैं.
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

उतर जाए

दिल से हर शख्स जब उतर जाए
राबिता ......दरमियां बिखर जाए,
हक़ बुलंदी है ......सिर्फ़ ख़ामोशी,
बस .....किसी ग़ैर के न घर जाए...
उर्मिला माधव,
22.2.2016

बात नहीं

ख़ाक छान के इतना ही जाना है बस दुनियांदारी अपने बस की बात नहीं,
उर्मिला माधव,
22.2.2018

Thursday, 20 February 2020

सब्र

सब्र बिलकुल थक चुका हो,जिस्म भी बीमार हो
दिल भी बुझकर ख़ाक हो,तो क्या कोई कर पायेगा  .....
उर्मिला माधव...
21.2.2016

देर कर गए

रहजन मुग़ालते में बहुत देर कर गए,
रफ़्तार में थे हम सो हवा से गुज़र गए...
उर्मिला माधव,
21.2.2017

बरमला

हर रंग बरमला है के सब पर अयाँ हूँ मैं
साबित हुआ है आज ये कोह-ए-गिरां हूँ मैं
उर्मिला माधव
21.2.2018 ji

उसे कह दीजो

मेरी दुनियां में बहुत ग़म है, उसे कह दीजो,
मैं मगर ख़ुश हूँ उसे सच न बतइयो हरगिज़..
उर्मिला माधव

Wednesday, 19 February 2020

ज़ियादा सोचा

मैंने रो-रो के उसे ख़ुद से ज़ियादा सोचा,
अपनी आंखों पे सितम ख़ूब किया रोरोके...
उर्मिला माधव

Tuesday, 18 February 2020

आकर मियां

हैलो-हैलो क्यों करो.....आकर मियाँ,
है कोई रिश्ता नहीं जब......दरमियाँ,
बे-वज्ह ही चल दिए......गुफ्तार को,
जाओ तुम अपना संभालो घर मियाँ 
उर्मिला माधव...
19.2.2014.

Monday, 17 February 2020

दस्तार में

जितने ज़्यादह पेच रख्खोगे मियाँ ....दस्तार में,
उतना ज्यादह ख़ुश्क लहजा आएगा गुफ्तार में...
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jitne zydah pench rakhkhoge miyaan dastaar main,
utnaa zydah khushq lahjaa aayegaa....guftaar main... 
Urmila Madhav...18.2.2017...

इजाज़त हो

अब मुहब्बत हो....या अदावत हो,
चाहे हिजरत हो ....या बग़ावत हो,
जो भी होना था हो लिया अबतक,
बस के अब ..हश्र की इजाज़त हो,
उर्मिला माधव...
18.2.2017

दोस्तो

इतनी मुश्किल खड़ी मत करो दोस्तो,
इक न इक दिन यहां सब बिखर जाएंगे,
ज़िन्दगी पे भरोसा ....…..ग़लत बात है, 
तुम भी मर जाओगे हम भी मर जाएंगे,
उर्मिला माधव,
18.2.2018

Sunday, 16 February 2020

तारीख़ बतला दो

हमारे इम्तिहां कब तक हैं वो तारीख़ बतला दो,
बहुत पर्चे कड़े रख्खे हैं तुमने ......ज़िंदगानी के,
#उर्मिला माधव 
17.2.2015

इक घर

बड़े इक घर बना पाते हैं,पूरी ज़िंदग़ी देकर,
मगर औलाद ईंटों के भी टुकड़े बाँट लेती है....
उर्मिला माधव।।।
Bade ik ghar bana paate hain poori zindagi dekar,
Magar aulad। iinton ke bhi tukde baant leti hai....
Urmila Madhav
17.2.2016.

शबाब

अय मियाँ क्यूँ घिस रहे हो,बेवज्ह अपनी कलम,
शाइरी के वास्ते,दरकार है ......हुस्न-ओ-शबाब,
उर्मिला माधव
17.2.2017

ठहर गई

मेरी सांस गो कि ठहर गई,
मेरा जिस्म टूट के गिर गया,
जो गले लगा के कही कभी,
वही बात कहके वो फ़िर गया
उर्मिला माधव
17.2.2018

मेयार पर

अब कोई भी शख़्सियत टिकती नहीं मेयार पर

कितनी हैरत है यहां पर लोग ख़ुद के भी नहीं..
उर्मिला माधव

Saturday, 15 February 2020

देखना

हर बुलंदी के सफ़र को हाशिये पर देखना,
क्यूंकि उसके बाद सारे रास्ते नीचे को हैं ....
उर्मिला माधव..
16.2.2015...

ख़ैरियत

Zindagi ka khairiyat se wasta kuchh bhi nahin,
Phir bhi duniyan khairiyat hii maangti rahti hai bas
Urmila Madhav
16.2.2018

Friday, 14 February 2020

सहना ही है

सोज़े ग़म हल्का नहीं होता किन्हीं अल्फ़ाज़ से,
ज़िन्दगी सच बोलती है, और हमे सहना ही है...
दर्द की बुनियाद का हिस्सा हैं गिरया और लहू,
जो भी हों हालात इनको हर तरह बहना ही है...
उर्मिला माधव
15.2.2019

Wednesday, 12 February 2020

छुप गए

नए सुखनबर तीरगी के ज़ेरे साये,छुप गए,
नामचीनों को दिखाकर,.सुर्खियां लूटी गईं.....

*****
Naye sukhan var teergi ke zere saaye chhup gaye,
Naam cheenon ko dikhaa kar surkhiyan looti gayin ..
उर्मिला माधव...
13.2.2015

घबरा गए

आँख में आंसू ......हमारे आ गए,
आज जब चलने में हम घबरा गए,
उर्मिला माधव,
13.2.2017

दो शेर

दो शेर अलग-अलग..

ढूंढ कर दिखलाइये अब सुर्ख़ रंगों की चमक,
इक सफ़ेदी है यहां, फिर दूर तक कुछ भी नहीं

एक ग़म से टूट  कर फिर उठ नहीं पाए कभी,
उम्र भर कोशिश रही,दुनियां को हम भी देखते..
उर्मिला माधव,
13.2.2014

ख़ुद मुख़्तार

हम किसीकी ज़िन्दगी पर तज़किरा भी क्यों करें,
जो भी हैं नस्लें नई वो ख़ुद-ब-ख़ुद मुख़्तार हैं
उर्मिला माधव

लब खुले रखे

शर्मो हया के नाम पर आंखों को ढक लिया,
बोसे की ख़्वाहिशों में मगर, लब खुले रखे
उर्मिला माधव

Tuesday, 11 February 2020

जानता है

देख जाने वाले तुझको सोचना क्या

ज़िन्दगी है, जाने क्या-क्या छूटता है,
जिस्म-ओ-जां से राब्ता भी टूटता है,
अपनी मुट्ठी में मुक़द्दर बांधता है,
कुछ नहीं रुकता है, ये भी जानता है,

रोज़ रोता और बिलखता ज़िन्दगी पर,
कुछ नहीं रुकता है, ये भी जानता है
चाहे जितनी हों तिरी मजबूरियां,
जिस से रहनी हैं, रहेंगी, दूरियां,

कुछ नहीं रुकता है तू भी जानता है
उर्मिला माधव

Monday, 10 February 2020

दुनिया की

पहले होती थी फ़िक़्र दुनिया की,
अब किसी बात की नहीं होती..

ग़ालिब की भतीजी

सो ही जाते हैं

क्या जगा जाए इस ख़राबे में
नींद तारी है, सो ही जाते हैं

जै गिर्राज जी की

भीगता होगा कोई

अब्र बरसा तो बड़ी ज़ोर से सीना धड़का,
ये रही फ़िक़्र कहीं भीगता होगा कोई,
उर्मिला माधव

वक़्त बाक़ी है

अभी तो रात के कटने में वक़्त बाक़ी है
अभी से फ़ैसला करने का हक़ नहीं तुमको 
ये मेरी रफ़्त का हिस्सा है सिर्फ़ हंस देना,
बला का हौसला करने का हक़ नहीं तुमको
उर्मिला माधव

Saturday, 8 February 2020

मंत्रणा है

प्रेम भी एक मृत्यु जैसी यंत्रणा है,
भावना की और ह्रदय की मंत्रणा है...
उर्मिला माधव...
९.२.२०१४...

हिसार कहाँ

ज़िंदगी जिसमें बहुत देर रुका करती थी,
वो सनमख़ाने कहाँ और वो हिसार कहाँ,
उर्मिला माधव,
9.2.2017.

Friday, 7 February 2020

ख़्वाब देखेंगे

नींद आई तो ख़्वाब देखेंगे,
जोड़ बाक़ी,हिसाब देखेंगे
कैसे ख़ुद पै हंसे कहाँ रोये,
दिन का लब्बो लुवाब देखेंगे....
#उर्मिला
8.2.2015...

Thursday, 6 February 2020

chand sa

tumko nihaarun umr bhar ye chahta hai dil, miraa
kitne  pyaare hath hain or chehra jhilmil chand saa, 😊😊
Urmila Madhav..

अना हो गई

हद से जादा खुदा की...अना हो गयी,
मेरे हाथों की मेंहदी......फना हो गयी,
नाम जिसका लिखा था जबीं पर मेरी,
उम्र भर को वो बिंदिया..मना हो गयी....
उर्मिला माधव...
7.2.2014

बटन

बंद कर लें आस्तीनों के बटन,
जब गले मिलना हो गहरे दोस्त से...
उर्मिला माधव
6.2.2016

जब देखो तब मांग

कुण्डलिया छंद....

क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग... 
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
7.2.2016

अलग होता

तू मेरे पास जो आता तो कुछ अलग होता,
नज़र चुरा के भला किस से बात करता है ?
उर्मिला माधव

नशे में हूँ

तस्वीर पर कहा गया शेर ----

नहीं है हाथ में जुम्बिश के मैं नशे में हूं,
ये अपना सागर-ओ मीना उठा के ले जाओ
उर्मिला माधव
7.2.2019

गुलाब लगती थी

जब ये सूरत गुलाब लगती थी,
कितनी आंखों का ख़ाब लगती थी,
खिलते चेहरे पे ताज़गी थी बहुत,
वो भी सबको ख़राब लगती थी...
उर्मिला माधव

Wednesday, 5 February 2020

अनजान थे

लोग खुद को ....शादमां समझा किये,
गो कि मुस्तक़बिल से सब अनजान थे,
उर्मिला माधव
5.२.2015....

फाग गाते हैं

वो जो ...उल्फ़त का राग गाते हैं,
सर्द मौसम में.........फाग गाते हैं,
जिनको मतलब है,दुनियादारी से
जोड़,बाक़ी ......ऑ भाग गाते हैं...
#उर्मिलामाधव
::
Wo jo..........ulfat ka raag gaate hain,
Sard mausam main faag gaate hain
Jinko matlab hai duniyan daari se,
Jod,baaqi ..........o bhaag gaate hain
Urmila Madhav..
5.2.2016

अब तक

उसकी गुफ्तार है,काग़ज़ पै सियाही अब तक,
जिसने किरदार से हरगिज़ न निबाही अब तक,

चार लफ़्ज़ों में दिलासा जो दिया ग़म के तईं,
उसकी करता है फ़क़त क़र्ज़ उगाही अब तक....
उर्मिला माधव

5.२.2015

कह दिया

हमको दीवाना समझ कर जाने क्या-क्या कह दिया,
हम तो अपने आप में थे,बेज़ुबाँ ऑ बेख़बर
उर्मिला माधव,
5.2.2018

मान लेते हैं

आप कहते हैं, मान लेते हैं,
वरना हम ज़र्फ़ जान लेते हैं
सब्र को आज़माना पड़ता है
अपनी अबरू जो तान लेते हैं...
उर्मिला माधव

Monday, 3 February 2020

ज़ख़्म

ज़ख़्म गिनती में .....चार लगते थे,
ये भी दुनियां ही गिन सकी शायद...
उर्मिला माधव ..
4.2.2017

होश

कुछ इरादे ज़िन्दगी के यूँ भी हो जाते हैं चूर
हम नहीं चाहें मगर दुनियां उड़ा देती है होश
उर्मिला माधव
4.2.2018

Saturday, 1 February 2020

आओ तो

आओ अब मेरे मुक़ाबिल आओ तो,
जी के बस मेरी तरह दिखलाओ तो,

बचती रही

मैं ही अपना सर छुपा कर उम्र भर बचती रही,
वरना मुझ पर आपने पथ्थर उठाये थे बहुत...
::
Main hii apna sar chhupaa kar umr bhar bachti rahii,
Warna mujh par aapne,paththar uthaaye the bahut...
#उर्मिलामाधव..
2.2.2016

ख़म बहुत

जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
::::
Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
उर्मिला माधव
27.1.2016

आदमी की ज़ात से

कोफ़्त होती है हर इक हालात से,
उठ गया दिल आदमी की ज़ात से..
उर्मिला माधव
2nd February
2018