Saturday, 30 November 2019

लगी हुई

अब्र-ए-बहार तुझको बरसना है किस जगह,
हर दश्त में है आग .........बराबर लगी हुई
उर्मिला माधव..

Friday, 29 November 2019

ज़िंदह रहती है

जब बेजा अल्फ़ाज़ बहुत चिल्लाते हैं,
मुझमें इक ख़ामोशी ज़िंदा रहती है
उर्मिला माधव
30.11.2017

आफ़ताब

ऐसे भी रंग लाता है अज़मत का आफताब,
पुरज़ोर है तबस्सुम,दिल ग़म से पाश-पाश ... 
#उर्मिलामाधव....
29.11.2015

नईं नईं

मुहब्बत है हमें तुमसे,.ज़रूरत ही नहीं,नईं-नईं,
छुड़ा लेंगे तुम्हें तुमसे,..ये सूरत ही नहीं,नईं-नईं,
हमारा दिल दुखाने  में, ...ज़.माने बीत सकते हैं,
ज़रा भी ज़र्क़ आ जाए,वो मूरत ही नहीं,नईं-नईं..
उर्मिला माधव,
29.11.2016

Thursday, 28 November 2019

रहने भी दो जाओ

तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ,
बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ,
कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ?
अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ..
उर्मिला माधव,
29th november

नज़्म छोटी सी

हमने अपनी धड़कनों को थाम कर, 
उससे थोड़ी ज़िन्दगी क्या मांग ली,
वो मगर कुछ भी न बोला देर तक,
और जब बोला तो बस इतना कहा,
आप हमसे इस क़दर क्यूं बोलते हैं.....
उर्मिला माधव

क़ाबिल हुए हैं

हम बड़ी मुश्किल से इस क़ाबिल हुए हैं,
अब कहीं जाकर बहुत मुश्किल हुए हैं,

क़द्र करते करते ही बदहाल थे हम,
इस जहां में बेसबब बिस्मिल हुए हैं

ग़म जहाँ भर के हुए यकजा तभी से,
क्या करें ज़ाहिर के अब बेदिल हुए हैं,
उर्मिला माधव
29.11.2018

Wednesday, 27 November 2019

तासीर क्या है

हमारी मुहब्बत की तासीर क्या है,
समझने में तुझको बहुत दिन लगेंगे,
उर्मिला माधव

Tuesday, 26 November 2019

हंसराज हंस

हम तो बिक जाते हैं उन अहले करम के हाथों,
करके अहसान भी जो नीची नज़र रखते हैं
हंस राज हंस

इंतज़ाम करते हैं

जिनका हम एहतराम करते हैं,
वो ही कुछ ऐसा काम करते हैं,
जीने-मरने पे ..बात जा पहुंचे,
दिल का वो इन्तज़ाम करते हैं.

Jinka ham ehtram karte hain,
Wo hii kuchh aisa kaam karte hain,
Jeene marne pe baat ja pahunche dil ka wo intazaam karte hain..
उर्मिला माधव

Monday, 25 November 2019

धूल करते हैं

हम जो रह-रहके भूल करते हैं,
अपनी इज्ज़त को धूल करते हैं,
इक नुमाइश ग़मों की होती हैं, 
ज़िन्दगी बस फ़िज़ूल करते हैं,
उर्मिला माधव...
२६.११.२०१३..

इफ़रात हुई

हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016

नहीं होती

पहले होती थी फ़िक़्र दुनियां की,
अब ...किसी बात की नहीं होती,
ज़िन्दगी ......जितनी है हमारी है,
दिन की ...या रात की नहीं होती...
उर्मिला माधव
26.11.2017

Thursday, 21 November 2019

पहाड़ों की सांसों की रफ़्तार

पहाड़ों की साँसों की.......रफ़्तार कहना,
तो बतलायेंगे हम......नदी का भी बहना,

ये सूरज निकलना......हवाओं का चलना,
दरख्तों पे शाखों का.......लहरा के हिलना,

ये झरनों के पानी का........नीचे फिसलना,
कि नदिया के पानी में हिल-मिलके चलना,

यकायक पहाड़ों का............लावा उगलना,
काली घटाओं का...............ऐसा मचलना,

यूँ छन-छनके.......अब्र-ए-बहारां निकलना,
बहुत खूब नदिया का.......चलना-उछलना,

कभी कुछ बिगड़ना......कभी कुछ संभलना,
हर इक रंग में है .............रफ़्तार मिलना......
उर्मिला माधव...
२३.९.२०१३

सुन तो ले

Sare mahfil hazaaron baat kahne waale sun to le,
Fajiihat ko sanbhalun ab ke ye lahaja sambhaalun main....
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सरे महफ़िल हज़ारों बात कहने वाले सुन तो ले,
फ़जीहत को संभालूं अब के ये लहज़ा संभालूं मैं.......
उर्मिला माधव....
22.11.2014...

बयां होती है

हिज्र का दिन है मगर रात अयां होती है,
जितनी वीरानी है सब आप बयां होती है,
उर्मिला माधव

Wednesday, 20 November 2019

दिल्लगी

Kyun hawa dete ho aakhir jangalon ki aag ko,
Jalane walon se kabhi bhi,dillagi achhii nahin..

क्यों हवा देते हो आख़िर जंगलों की आग को,
जलने वालों से कभी भी दिल्लगी अच्छी नहीं,
उर्मिला माधव,
21.11.2017

आबाद रखा

हमने इक दश्त को आबाद रखा,
हम किसी ...आसतां से डरते हैं.
उर्मिला माधव

Monday, 18 November 2019

तश्ना लब के घर

सड़कों पे रो रहे हो यहां ....आएगा भी कौन,
बरसात बन के जाओ किसी तश्ना लब के घर..
उर्मिला माधव,
19.11.2017

Saturday, 16 November 2019

थाती रे

जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,

तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016

आकर देख ना

मेरे साक़ी शोखिये रिन्दाना आकर देख ना,
बे-अदब हाथों में है पैमाना,आकर देख ना,....

रंग-ए-महफिल देखने के वास्ते ही आ ज़रा,
हर सलीकेमंद का चिल्लाना,आकर देख ना,

हर कोई मैकश का जामा ओढ़ कर झूमे यहाँ,
मुख़्तसर,गिरता हुआ दीवाना,आकर देखना, 

हर अदावत में अदाकारी की है बस इन्तेहा,
एक लम्हा ही सही पर आना,आकर देख ना,

शैख़ है या है बिरहमन,जानना मुश्किल हुआ,
कौन कितना होगया मस्ताना,आकर देखना,
उर्मिला माधव...
17.11.201...

गवाही में

तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव

रोज़ रख देना

ख़यालों की मशक़्क़त रोज़ करना,रोज़ रख देना,
हमेशा कोशिशें रखना, ज़हन ख़ाली न हो जाए...
उर्मिला माधव,

Friday, 15 November 2019

जाती हूँ मैं

जोश-ए-उल्फ़त में सू-ए-दिलबर चली जाती हूँ मैं,
कौन हूँ,क्या चाहती हूँ........कब ये बतलाती हूँ मैं,
बे-तवज्जो सा रवैय्या............बाखुदा महबूब का,
तोड़ता जाता है वो............और जोड़ती जाती हूँ मैं.....
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

भरना पड़ा

आज ख़मियाज़ा तेरी उल्फ़त का भी भरना पड़ा,
इस क़दर गुज़री,यक़ायक़ ज़ब्त भी करना पड़ा,
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

Thursday, 14 November 2019

थका जाता है

पाँव थकते तो अजब क्या था,नई बात न थी,
कितनी हैरत है यहां दिल ही थका जाता है..

Paanv thakte to ajab kya tha naii baat na thi,
Kitni hairat hai yahan,dil hi thaka jata hai..
उर्मिला माधव 
15.11.2017

ग़म किसीका

अजब तमाशा है आशिक़ी का,
नज़र किसीकी सनम किसीका,

ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में,
न कोई समझे है ग़म किसीका,
उर्मिला माधव

Wednesday, 13 November 2019

रह गए

तीर ऑ तलवार हो कर रह गए,
बे-वज्ह हथियार हो कर रह गए,

प्यार से दामन भरा हर शख़्स का,
और अदू हर बार हो कर रह गए,

जिसका जी चाहा वो कुछ भी कह गया,
इस क़दर बाज़ार होकर रह गए,

झूठ और सच का कहाँ हो फैसला,
धारे भी जब धार हो कर रह गए,

हम मुहब्बत से गले मिलते थे पर,
लोग ही हुशियार हो कर रह गए,

चंद खुशियां ढूंढते फिरते थे हम,
ग़म गले का हार हो कर रह गए..
उर्मिला माधव,
14.11.2017

Tuesday, 12 November 2019

दिये देखा किये

बैठ कर अपने दिए ....देखा किये,
हम दिवाली और पटाखा क्या करें ...
#उर्मिलामाधव...
13.11.2015..

कम नहीं कुछ

कारसाज़ी उसकी,उसका मौजिजः है,
ज़िन्दगी है ख़ैरियत से कम नहीं कुछ,

Karsazi uski ......uska maujizah hai ,
Zindagi hai khairiyat se,kam nahin kuchh..
उर्मिला माधव,
13.11.2017
मौजिज:--- चमत्कार

Saturday, 9 November 2019

सुर्ख़ी नहीं

आंख में काजल नहीं और मांग में सुर्ख़ी नहीं,
पर मुहब्बत का मुझे मालूम हर उसलूब है,

Aankh me kajal nahin or maang me surkhii nahiN,
Par muhabbat ka mujhe maaloom har usloob hai.
Urmila Madhav.

सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

है ही नहीं

तू मुसलमां है मुझे ये तो ख़बर है ही नहीं,
इतने हिस्सों में अगर है तो बशर है ही नहीं,

Tu musalmaaN hai mujhe ye to khabar hai hi nahiN,
Itne hissoN me agar hai to bashar hai hi nahiN.
Urmila Madhav

जंजीर

मुझको ये मालूम था, दुनियां टेढ़ी खीर,
उससे भी ऊपर हुई, पैरों की ज़ंजीर...
उर्मिला माधव..

Thursday, 7 November 2019

कर दिया क्या ?

इश्क़ ने उसको मुक़म्मल कर दिया क्या,
लोग उसको भूलते से जा रहे थे…..
उर्मिला माधव

Wednesday, 6 November 2019

क्या समझे

मुहब्बत की ज़ुबां समझे न धड़कन की ज़ुबां समझे,
अभी तक हम नहीं समझे,कि वो समझे तो क्या समझे.

Muhabbat ji zubaaN samjhe na dhadkan ki zubaaN samjhe,
Abhi tak ham nahin samjhe ki wo samjhe to kya samjhe.
Urmila Madhav

दोहा

ऐसे तो सब खैरियत,फिर भी हैं बद हाल,
कब से करते आ रहे,ग़म का इस्तक़बाल.....
उर्मिला माधव...
7.11.2016..

नहीं लगता

तबीयत हट गई सबसे,कोई अपना नहीं लगता,
हक़ीक़त रु-ब-रु ही है,कोई सपना नहीं लगता
उर्मिला माधव,
7.11.2017

Monday, 4 November 2019

फ़र्क़ क्या

तुम कभी आओ न आओ फ़र्क़ क्या,
उम्र भर तो दूर ही रहना लिखा है,
उर्मिला माधव,
5.11.2017

थका दीजो

ज़िन्दगी इस क़दर थका दीजो,
तेरे करने को कुछ न रह जाये 
उर्मिला माधव
5.11.2917

होश में आ जाइए

ज़रा ....होश में आ जाइये,
इनसान जी.. ..ये फितूर है,
वही तुम करो .तो अना हुई?
वही हम करें ...तो ग़ुरूर है?
उर्मिला माधव..

था हमें मालूम

था हमें मालूम.....कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था....इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फ़ातिहा हो जायेगा
उर्मिला माधव...

साल मुबारक

साल मुबारक हम यारों को कह भी देते,
एकतरफ़ा सी बात ख़ुशामद लगती थी...
उर्मिला माधव

जबीं झुकती नहीं

किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
अगर कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
4.11.2015

भंवर

कितने भंवर लपेटे,मुश्किल में हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
#उर्मिलामाधव...
4.11.2015

Saturday, 2 November 2019

पाबंदियां

वो हमें पाबंदियां समझा गए,
जो फ़क़ीरों से कभी वाकिफ़ न  थे, 
उर्मिला माधव