ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 29 October 2021
shikayat ho gai hai ab
उन्हें हमसे मुहब्बत में शिकायत होगई है अब,
कि पैग़ाम-ए-मसर्रत में किफ़ायत होगई है अब,
ज़रूरी तो नहीं अब तक वो हमको याद ही रक्खें
निगाह-ए- ग़ैर की उन पर इनायत होगई है अब।
...उर्मिला माधव.
26.2.2013
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