Thursday, 28 October 2021

हर गाम। इम्तिहा है

इंसाँ की ज़िन्दगी भी .......हर गाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे .....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुकम्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
3.7.2013

ग़ाम---क़दम
तौफ़ीक़---शक्ति
आब-ए-हयात--ज़िन्दगी का पानी--यानी ---अमृत
रहगुज़र--रास्ता
मुक़म्मल--अटल
आलिम---विद्वान..

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