एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,
1.1.2018
Monday, 31 December 2018
सर्वज्ञ है
ज़हमत उठाई आपने
मेरे दिल में आज ये नफ़रत जगाई .....आपने,
इस क़दर बेजा हर इक हरक़त दिखाई आपने,
मेरी हिम्मत तौलने को ...हर नफ़स तैयार सब,
इसलिए हर चंद हर ज़हमत उठाई ......आपने...
उर्मिला माधव...
Saturday, 29 December 2018
शक़्ल अब
किस-किसके हासिलात पै हलकान रहोगे,
बदरंग हो चुकी है ..ज़माने की शक्ल अब....
उर्मिला माधव....
30.12.2014....
जीता भी क्या
सांस भत्ते में मिली ....जद्दोजेह्द का बार भी,
इक गुज़ारेदार महंगी ज़िन्दगी जीता भी क्या...
उर्मिला माधव..
30.12.2016
Friday, 28 December 2018
लालसा
कोई लालसा हमको अब होती ही कब है,
वरना सब से खोद-खोद कर पूछा करते,
कैसे हो, क्या करते हो अब, अच्छे हो ना ?
ख़ामोशी पर सबकी, चुप-चुप रोया करते
उर्मिला माधव
Thursday, 27 December 2018
ताबानी
ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी.....
उर्मिला माधव.
शमा
अक्स उनका रात-दिन हलकान करता था हमें,
हम इधर मानिंद-ए-शम्मा हर नफ़स जलते रहे,
उर्मिला माधव...
28.12.2016
Wednesday, 26 December 2018
जन्नत दिखाएंगे
अब आपको ज़मीन पर ....जन्नत दिखाएँगे,
हम अपनी माँ के हाथ का एक ख़त दिखाएंगे...
उर्मिला माधव....
27.12.2014..
Sunday, 16 December 2018
देखा जाएगा
ठोकरों के बल पे मैंने सारी दुनियां नाप दी,
अब सुकूँ बाक़ी रहा सो वो भी देखा जाएगा..
उर्मिला माधव..
17.12.2016
Saturday, 15 December 2018
Thursday, 13 December 2018
कौन थे वो लोग जो
Kaun the wo log jo sab hanste gaate the yahan,
Ham to jab se aae hain Ik aag see dekhi hai bas
कौन थे वो लोग जो बस हंसते गाते थे यहां,
हम तो जब से आए हैं,इक आग सी देखी है बस,
उर्मिला माधव
14.12.2017
Wednesday, 12 December 2018
जगा कर देख
सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं......आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है..अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ तब...रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जाता है,अपना पाँव बढ़ाकर देख,
उर्मिला माधव...
12.12 2017...
Sunday, 9 December 2018
ज़माने लगे
ग़म यूँ ही दुश्मनों को बताने लगे,
ये समझने में हमको ज़माने लगे,
हाल क्या है हमारा ये पूछा मगर,
दर्द सुन करके वो मुस्कुराने लगे,
उर्मिला माधव....
10.12.2014....
निकलते रहिये
दुनियां में गर जीना हो तो शोलों पर भी चलते रहिये,
सूरज की मानिंद हमेशा बस हर रोज़ निकलते रहिये..
उर्मिला माधव
Friday, 7 December 2018
कर न सके
मेरी नज़र का कोई एहतराम कर न सके,
अजब कमाल रहा एक काम कर न सके,
वक़ार मेरी मुहब्बत का पुर कुशादह है,
कमाल तुम हो के उठके सलाम कर न सके,
उर्मिला माधव..
Wednesday, 5 December 2018
Tuesday, 4 December 2018
ज़का
मुहब्बत को मीज़ान पर क्या रखोगे ?
ज़का से लक़ा तक तुली आ रही है,
उर्मिला माधव
5.12.2017
ज़का-बुद्धि
लक़ा-सूरत
मीज़ान-तराजू
दीवार सी हो जाएगी
हमने दीवारें चुनी हैं......ज़िन्दगी के वास्ते,
एक दिन ये ज़िन्दगी,दीवार सी हो जाएगी,
Hamne deewaren chuni hain zindagi ke waaste,
Ek din ye zindagi,deewar si ho jaegi.
उर्मिला माधव
Sunday, 2 December 2018
तुम्हारा हो गया
जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव...
3.12.2016
समर्पण के लिए
बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
3.12.2014...