Monday, 26 September 2016

दिल,जिगर,दामन,गरेबाँ,चाक सब,
अब समझना है हमें ये चैन क्या है ?
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Dil,jigar,daaman,garebaa'N chaak sab,
Ab samajhna hai hamen ye chain kya hai ?
उर्मिला माधव...
एक मतला एक शेर-------
मैं ज़माने से हूँ ज़रा ऊपर,और ज़माना है मुझसे कुछ ऊपर,
इसके आगे दहाने मक़तल है,उठके जाना है,ख़ुद से कुछ ऊपर.
न न दुनियां पसंद है ही नहीं इस में कहने को कुछ नहीं बाक़ी,
दह्र जायेगा आसमानों तक मुझको जाना है उससे कुछ ऊपर
उर्मिला माधव...
11.9.2016
गली-गली में ग़ालिब मिलते,हर नुक्कड़ इक मीर मिले,
बड़े ग़ज़ब के तेवर इनके जैसे कोई शमशीर मिले,
बड़ी हिक़ारत से देखा जब उनसे दुआ सलाम हुई,
सोच रहे थे वो आख़िर क्यों मुफ़लिस को जागीर मिले,
उर्मिला माधव...
12.9.2016
दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो उसे वो दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो की गई है दिल से वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......use wo deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo kii gaii hai dil se.......wo tanqiid mubaaraq...
उर्मिला माधव....
Comment
अभी इतिहास के पिछले सुफहे पूरे नहीं भूले,
नई एक इब्तेदा की आज फिर पहली कड़ी है,
क्या ज़रूरत है कसौटी पर अकेले हम खरे उतरें,
करें क्यों मश्क आखिर ज़िन्दगी कितनी बड़ी है ?
उर्मिला माधव,
13.9.2016
बस यही तो भेद है मानव की पूरी जाति का
अनुकरण करता रहा है व्यर्थ झूठी ख्याति का
भावना जो व्यक्त करदे वो कहाँ वाणी निकृष्ट??
स्वयं ही करता विभाजन धर्म और प्रजाति का
उर्मिला माधव...
13.9.2016
इस क़दर ठोकी गईं .....कीलें मेरे ताबूत में,
बाद मरने के ये जाना,दुख्तर-ए-ईसा थी में...
उर्मिला माधव.
14.9.2016
लो बेचारे मर गए दब कर ग़ुरूर से,
सब कर गए सलाम उन्हें दूर दूर से...
उर्मिला माधव...
15.9.2016
वक़्त ने ......जब-जब सताया है बहुत,
रंज-ओ-ग़म ...चेहरे पे आया है बहुत,
माफ़ की हैं सब की, सब गुस्ताखियां,
मुझ पे जब ..कोइ मुस्कराया है बहुत...
उर्मिला माधव...
17.9.2016
आप की रोज़ बढ़ती रहें .....खूबियां,
नाम के साथ चस्पां रहें ......सुर्खियां ,
हर ज़ुबाँ पे रहे,सिर्फ़ "कविता किरण"
जन्मदिन की मुबारक रहें ...मस्तियाँ..
उर्मिला माधव...
17.9.2016
ज़िन्दगी भी .अब मुसलसल पूछती है,
और कितना मुझको तुम ज़ाया करोगे...?
उर्मिला माधव..
18.9.2016
मेरी शाहाना शख़्सियत देखो,
हूँ मुक़ाबिल ...कई हुजूमों के...
उर्मिला माधव ...
18.9.2016
साहिबे आलम जी क्या छुट्टी पे हैं ?
हमतो समझे थे के बस कुट्टी पे हैं... :)
उर्मिला माधव...
19.9.2016
जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो,
जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो,
जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ?
तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़ुरूर है जो भी होगे तुम वो हुआ करो।।..
उर्मिला माधव....
6.4.2013
उससे हरगिज़ ....कोई गिला ही नहीं,
वो तो मुझसे कभी .....मिला ही नहीं,
दिल ही दिल में उसे ......छुपाये रखा,
जिस मुहब्बत का कुछ सिला ही नहीं..
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Us-se hargiz koii ......gilaa hii nahiN,
Wo to mujhse kabhi milaa hii nahiN,
Dil hii dil men use ....chhupae rakhaa
Jis muhabbat ka kuchh silaa hii nahiN...
Urmila Madhav...
24.9.2016
हमने जाने क्या-क्या अपना खो दिया,तुम क्या हो जी ?
हमको भी अब खलवतें दरकार है .....तुम जाओ जी,..
उर्मिला माधव..
25.9.2016

Friday, 26 August 2016

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
#उर्मिलामाधव...
13.6.2015...

Thursday, 21 April 2016

क्या हसीं गुलशन यहाँ है फूल इसमें कम नही,
छोड़के उड़ जायेंगे,इस बात का कोई ग़म नहीं।....
Urmila Madhav
22.4.2013
heart emoticon
जिनकी हम क़द्र कर न पाते हैं,
वो कभी दूर बहुत दूर चले जाते हैं...
Urmila Madhav
22.4.2013
अय हटो रहने भी दो लफ्फाजियां सब,
हमने कब की छोड़ दीं ये बाजियां सब,
उर्मिला माधव...
22.4.2014..
खारिशों से ग़ैर की बचके ही चलना ठीक है,
ख्वाहिशों के दायरे ....महदूद रखने चाहिए.....
‪#‎उर्मिलामाधव‬...
22.4.2015
महदूद--- सीमित
हैं अज़ल तक कोशिशें,क़ायम मेरी,
ज़िंदगी समझें न वो दायम मेरी,
‪#‎उर्मिलामाधव‬...
22.4.2015

Monday, 18 April 2016

मजलूम के दिल की तड़पन को एक बार कभी तो जाके सुनो,
वो ख़ुदकुश है,ख़ुद मैय्यत है, ख़ुद ज़िक्र नहीं बस करता है

Majloom ke dil ki tadpan ko,ek baar kabhi to jaake suno,
wo khudkash hai,khud maiyyat hai,khud zikr nahin bas karta hai..
उर्मिला माधव...
30.3.2016
उलाहना दे रहे हो,यार तुम तो हद करो हो,बस,
मुहब्बत हो गई तुमसे तो क्या जागीर ले ली है?
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Ulahan'a de rah'e ho yaar tum to had karo ho bas,
Muhabbat ho gai'i tums'e to kya jaagiir le lii hai ?
Urmila Madhav....
31.3.2016
Hasad ke baar se dab kar koi shayar nahi uttha,
Ye aisi aag hai,jis-se sukhan zinda nahin rahtaa..
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हसद के बार से दब कर कोई शायर नहीं उट्ठा,
ये ऐसी आग है जिससे,सुखन ज़िंदा नहीं रहता,.....
Urmila Madhav..
31.3.2016
आज भी तुम आशना हो और रहोगे उम्र भर,
हाँ मगर कोशिश यही है,दूरियां क़ायम रहें...

एक भी तुम लफ़्ज़ हमसे कह न पाओ चाहकर,
तुमने ख़ुद बोई हैं वो मजबूरियां क़ायम रहें
उर्मिला माधव...
3.4.2016
जब कलेजे से खूं निकलता हो,
सब्र से ....काम तब लिया जाए...
उर्मिला माधव...
4.4.2016
वो जो कुछ ख्वाब से थे इन मिरी मरहूम आँखों में,
ज़रा मिजगां उलट कर देखना.....ज़िंदा रखे होंगे ....
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Wo jo kuchh khwab se the, in meri marhoom aankho'n men
Zara mijga'n ulat kar dekhna,zind'a rakhe honge...
Urmila Madhav...
6.4.2016
मिजगां--- पलकें
ताने-बाने ज़िन्दग़ी के .........राह क़ब्रिस्तान की,
जी में जो आया किया कब फ़िक्र की ईमान की,
क्यूँ कलेजा मुँह को है ले क़त्ल का दिन आ गया
देख ले ये ही हक़ीक़त है .........यहाँ इन्सान की ।..
Urmila Madhav
8.4.2016
कभी दामन किसी का थाम कर चलना नहीं हरगिज़,
अगर चलना ही है तो ख़ुद-ब-ख़ुद उठना है चलना ख़ुद...
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kabhi daaman kisika thaam kar .....chalna nahin hargiz,
agar chalna hi hai to khud-ba-khud uthna hai,chalna khud....
Urmila Madhav.....
10.4.2016
मुफ़्त में जब मिल गई तो ख़ूब जम के पी गए,
फ़िर भी कितने ढीठ थे बरसा बरस वो जी गए
Urmila Madhav
10.4.2016

अपनी बिसात रखलूँ

इंसाँ की ज़िन्दगी भी ......हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे ....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
1.4.2016

पुर असर होता नहीं

क्या करूँ मैं ज़िन्दगी में ज़िक्र ला-परवाही का,
दिल किन्हीं रंगीनियों से पुरअसर होता नहीं,

जिसको देखो दौड़ता फिरता है अपने ढंग से,
मरहलों का रास्ता पर मुख़्तसर होता नहीं,
उर्मिला माधव ...
14.4.2015

ज़िन्दगी गुज़री जनाब

जीत और ज़िद में ही जिनकी ज़िन्दगी गुज़री जनाब
किसलिए फिर ......आदमी को आदमी समझेंगे वो...
उर्मिला माधव...
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Jiit or zid men he jinkii zindagi guzarii janaab
Kisliye phir..aadmii ko aadmii samjhenge wo....
Urmila Madhav..
14.4.2016