ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 26 September 2016
इस क़दर ठोकी गईं .....कीलें मेरे ताबूत में,
बाद मरने के ये जाना,दुख्तर-ए-ईसा थी में...
उर्मिला माधव.
14.9.2016
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