ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 18 April 2016
पुर असर होता नहीं
क्या करूँ मैं ज़िन्दगी में ज़िक्र ला-परवाही का,
दिल किन्हीं रंगीनियों से पुरअसर होता नहीं,
जिसको देखो दौड़ता फिरता है अपने ढंग से,
मरहलों का रास्ता पर मुख़्तसर होता नहीं,
उर्मिला माधव ...
14.4.2015
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