ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 18 April 2016
आज भी तुम आशना हो और रहोगे उम्र भर,
हाँ मगर कोशिश यही है,दूरियां क़ायम रहें...
एक भी तुम लफ़्ज़ हमसे कह न पाओ चाहकर,
तुमने ख़ुद बोई हैं वो मजबूरियां क़ायम रहें
उर्मिला माधव...
3.4.2016
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