ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 30 November 2025
वक़्त का सुबूत
उसने समझ लिया था मुझे वक़्त का सुबूत,
लेकिन ये ज़िन्दगी भी कभी सच कहाँ हुई।
उर्मिला माधव
Friday, 28 November 2025
ज़ख़्म
ये ऐसे ज़ख़्म हैं जिनका कोई बदल ही नहीं,
किसीका यूं ही बिछड़ जाना फिर नहीं आना
उर्मिला माधव
Monday, 24 November 2025
बरसता है जो आंखों से
बरसता है जो आँखों से उसे सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे साजन कहेंगे हम.....
#उर्मिलामाधव,
मुक़द्दस दिल
इस मुक़द्दस दिल की तुम तस्वीर जिस दिन देख लोगे,
बस तुम्हारी हर अदा की धज्जियां उड़ जाएंगी..
उर्मिला माधव
हम सियासत
Ham siyasat ko koii ilzaam den ya naa bhi den,
Haan magar ab zindagi aasaan bhi lagti nahin..
Is inayat ka bhala kya kijiyega dosto,
Jisme ik muflis ke ghar me daal bhi pakti nahin
Urmila Madhav
Sunday, 23 November 2025
बस एक तू है
बस एक तू है जिसे देख कर ही जिंदा हैं
यही वजह है मुझे सिर्फ़ तू ही दिखता है..
उर्मिला माधव
Friday, 21 November 2025
पढ़ा लिख्खा न था
तुमने उसकी शक़्ल देखी,
जिसपे लिख्खा था वजूद?
कनखियों से देख कर भी,
.........देखता कोई न था,
दिल ही दिल में मुस्कुरा के,
उसने ये सोचा के शायद,
आलिमों की भीड़ थी,
.लिख्खा-पढ़ा कोई न था,
उर्मिला माधव
बुलाता रहा
आह में टीस भी रही शामिल,
रात दिल का क़रार जाता रहा,
चांदनी बार-बार आती रही,
कोई रह-रह के जब बुलाता रहा,
उर्मिला माधव..
20.11.2017
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