Saturday, 30 October 2021

ye bhi sach hai

ये भी सच है मैंने तुझपे वक़्त तो खोया मगर,
था ज़रूरी ये बहुत तुझ को समझने के लिए 
उर्मिला माधव
31. 10. 2015

Friday, 29 October 2021

shikayat ho gai hai ab

उन्हें हमसे मुहब्बत में शिकायत होगई है अब,
कि पैग़ाम-ए-मसर्रत में किफ़ायत होगई है अब,
ज़रूरी तो नहीं अब तक वो हमको याद ही रक्खें
निगाह-ए- ग़ैर की उन पर इनायत होगई है अब।
...उर्मिला माधव.
26.2.2013

samander se hawa se

मैं समंदर से,हवा से,किसलिए लड़ती फिरूँ
जब मुझे अहसास है तू साथ तो देगा नहीं...
उर्मिला माधव
30.10.2015

क़द बराबर

ये शेर ख़ुद को महान समझने वालों के लिए है...

दोस्ती में क़द बराबर हो तो चल,
वरना भैये, फ़िर तू रस्ता नाप ले  
उर्मिला माधव

दुआ दरकार

दिल को दरकार जब दुआ भी नहीं,
फ़िक़्र फिर बद्दुआ की कौन करे...
उर्मिला माधव,

Thursday, 28 October 2021

क्रूर

मृत्यु को हम क्रूर कहते......ये हमारी भूल है,
येही जीवन चक्र है तब किस तरह प्रतिकूल है??

जन्म के ही साथ मृत्यु सर्वथा निश्चित यहाँ,
सत्यता से बचके चलना हर तरह...निर्मूल है...
उर्मिला माधव...
२९.१०.२०१३

मुहब्बत की दुनियां

muhabbat kii raftaar......tham sii gaii hai,
zamaana hai jaabir kise gam bataanaa,
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मुहब्बत की रफ़्तार थम सी गई है,
ज़माना है जाबिर,किसे गम बताना...
उर्मिला माधव...
29.10 2014..
जाबिर---- अत्याचारी

रुकिए। फ्री वर्स

हाय .... HI
रुकिए....
एक मुद्दत से रुका ही तो हूँ,
देखिये...
आँख है तो...
देखता ही तो हूँ...
सुनिए....
वक़्त ही ऐसा है सुनता ही तो हूँ...
उर्मिला माधव...
29.10.2014....

गुलों के पास

तस्वीरी शेर-----
jab gulon ke paas se guzre to ye dil kah uthaa,
bas dur-e-dindaan kii duniyaan hataa lo ik taraf....
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जब गुलों के पास से गुज़रे तो ये दिल कह उठा,
अब दुर-ए-दिन्दान की दुनियां हटालो इक तरफ़....
उर्मिला माधव...
29.10 2014...

हर गाम। इम्तिहा है

इंसाँ की ज़िन्दगी भी .......हर गाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे .....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुकम्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
3.7.2013

ग़ाम---क़दम
तौफ़ीक़---शक्ति
आब-ए-हयात--ज़िन्दगी का पानी--यानी ---अमृत
रहगुज़र--रास्ता
मुक़म्मल--अटल
आलिम---विद्वान..

Wednesday, 27 October 2021

चांद तारों के ख़ाब

चाँद तारों के ख़ाब देदेंगे 
जितने चाहो गुलाब देदेंगे,ऐसी गफ़लत में बस नहीं रहना,
उम्र भर का हिसाब देदेंगे
उर्मिला माधव

मिट्टी के सोपान

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है अंतर्दृष्टि जगा कर देख, 
जब साहस उत्तुंग हुआ तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जाता है अपना पाँव बढ़ाकर देख,
उर्मिला माधव...

Tuesday, 26 October 2021

उगल सकते हैं

लोग अच्छे हैं तो ख़ामोश बने रहते हैं,
वरना कुछ लोग हक़ीक़त भी उगल सकते हैं,
उर्मिला माधव

नज़र आ रही है

जहां तक ये दुनियां नज़र आ रही है,
वहां तक ये चिलमन है,दीवार भी है,

मशक़्क़त की हिम्मत दिखाऊँ भी कैसे,
अजब जी की हालत है बीमार भी है..
उर्मिला माधव

Monday, 25 October 2021

मेरा कभी नहीं था कभी

मेरा कभी नहीं था चलो मानती हूँ मैं,
पर मेरे बिन रहा वो कभी ये नहीं हुआ...
उर्मिला माधव...
26.10.2016

तलब

जो गुलामों की तलब रखता हो, वो,
क्या करेगा ....आदमी की ज़ात का...????
उर्मिला माधव..
26.10.2016

ख़वाब

चाँद तारों के ख़्वाब देदेंगे जितने चाहो गुलाब देदेंगे,
इतनी गफ़लत में बस नहीं रहना,उम्र भर का हिसाब देदेंगे
उर्मिला माधव
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Tuesday, 19 October 2021

kar diya rb ne

hamko khamosh kar diya rab ne ,
dil k daman ko bhar diya rab ne,
ab wo aansu the ya ki chhale the,
jo bhi tha nazr kar diya rab ne..
Urmila Madhav...

Monday, 18 October 2021

क्या करते

तनहा रहना था...और क्या करते,
उम्र भर किससे .सिलसिला करते,
अपनी दुनियां बहुत अलग सी थी,
राह हम...किस तरह से वा करते....
उर्मिला माधव....
19.10.2014...

ख़ुशी मुबारक हो

Dosto, her khushi mubarak ho,
Dil nashin zindagi mubarak ho,
Ye diwalii to .........ek din kii hai,
Umr bhar..raushni mubarak ho.

Urmila Madhav

Tuesday, 12 October 2021

धरम संकला

ब्रिज माधुरी 

थोरे दिन कौ जीवन है तौ मन कूँ चों भरमावै,
रह जागी यईं धरम संकला,सांस जबई रुक जावै,

माई बाप और पुत्र पौत्र कूँ,कितनौउ लाड़ लड़ावै
आँख मुंदी सोई भये बटाऊ,फिर कोउ लौट न पावै

नित-नित रार करै दुनियां में,ज़र,जोरू की खातिर,
बढ़िया हो जो हर काऊ ते,प्रीत की रीत निभावै,
उर्मिला माधव

शिकस्ता दिल हूँ

मैं मुब्तिला-ए-ग़म हूँ पर ना शिकस्ता दिल हूँ,
बिस्मिल भी हूँ सही है....हर गाम पाब दिल हूँ 
कोई रहनुमां नहीं है....नहीं कोई हमक़दम है,
पर दिल मैं है बुलंदी.....और आदतन सहल हूँ...
उर्मिला माधव...
१३.१०.२०१३ 
पाब्दिल----गिरफ्तार

चकरा गए

रस्सियों के बल से हम चकरा गए,
इस तरह से बीच में हम आ गए .....
उर्मिला माधव....
13.10.2014..

जी हमारा

जी हमारा उठ चुका है,हम नहीं जाते कहीं,
गोकि ज़िद के बादशा हैं,ग़म नहीं खाते कहीं,
भीड़ से हट के चलें ये अपने दिल की बात है,
पर क़दम रफ़्तार में हैं थम नहीं जाते कहीं,
उर्मिला माधव,
13.10.2018

बेवक़ूफ़ बनने में

बेवकूफ़ बनने में मेहनत लगती है,
कुछ धोके तो जान के हमने खाए हैं
उर्मिला माधव

Saturday, 2 October 2021

क़ुबूल करले

इन्सान कब हुआ है किसी ज़िन्दगी का मालिक,
रब ने दिया है तोहफ़ा, बस वो क़ुबूल कर ले...
उर्मिला माधव

रोए किसलिए

मुझको ख़बर नहीं है कोई रोए किसलिए,
जब रास्ते बने हैं, हर इक शख़्स के लिए.
उर्मिला माधव

जो तुझको हो पसंद वही काम कर गुज़र...
उर्मिला माधव

चलते हुए मिले

जो भी अज़ीज़ दोस्त थे, चलते हुए मिले,
हम ज़िन्दगी की शाम पर ढलते हुए मिले।
उर्मिला माधव

उलझनों के पार

हम उम्र भर रहे हैं यूं ही चिलमनों के पार,
और चाहते नहीं हैं कभी कोई ग़म गुसार,
अपनी ये ज़िन्दगी जो हमें है बहुत अज़ीज़,
समझेगा कौन क्या छुपा है उलझनों के पार.
उर्मिला माधव

होश में रहो

उसने तड़प के मुझसे कहा, होश में रहो,
मैं सुन कहां रही थी मुझे, होश ही न था...
उर्मिला माधव