ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 30 September 2025
जी नहीं लगता
कैसी भी बहारें हों अब जी नहीं लगता,
बेवजह नज़ारों में अब जी नहीं लगता,
कुछ रूह परीशाँ है,कुछ जिस्म परीशाँ,
पुरनूर सितारों में अब जी नहीं लगता..।।
उर्मिला माधव.....
Saturday, 20 September 2025
ज़िंदगी कब कब रही है मोतबर
ज़िन्दगी कब-कब रही है मोअतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर
ये तो कूज़ागर की ही मर्ज़ी है बस,
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव
Tuesday, 16 September 2025
एक मुद्दत से
एक मुद्दत से मेरे पीछे पड़ा है,
दर्द है के हर जगह आकर खड़ा है...
रास्ते कुछ और भी हैं दुश्मनी के,
ये बता तू किसलिए जिद पर अड़ा है?
#उर्मिलामाधव...
Tuesday, 9 September 2025
हम तेरे हिज्र से नहीं डरते
हम तेरे हिज्र से नहीं डरते,
यूँ भी डरते तो क्या नहीं मरते?
तुझ पे आहों का ही हवाला है,
हमतो इक ज़िक्र भी नहीं करते,
दिल कभी टूट कर नहीं रोया
वरना क्या आह भी नहीं भरते?
~उर्मिला माधव
Friday, 5 September 2025
सोचता कौन है
सोचता कौन है अब,रब के लिए,
मरते रहते हैं सब लक़ब के लिए,
ख़ुद की ख़ाहिश में ग़र्क़ रहते हैं,
कौन जीता है आज सब के लिए...
उर्मिला माधव
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