ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 12 June 2025
शख्सियत कुछ खास अपनी
शख़्सियत कुछ ख़ास अपनी है ज़रूर,वर्ना ये किस्से कहानी किसलिए??
खोजना लाज़िम है हम में हर कुसूर,वर्ना अपनी जिंदगानी किसलिए??
हो गया अब कब तलक बल खाओगे,ऐंठ कर मरना ज़रूरी है ही क्यूँ??
आप भी कुछ हादसे देखो ज़रूर,इतनी ज्यादा खींचा तानी किसलिए??
उर्मिला माधव
करबला सा हो गया
ये अजब एक वाक़या सा हो गया,
दर्द जब बढ़कर दवा सा हो गया,
अब अकेले हम, हमारे रात-दिन,
दिल हमारा,करबला सा हो गया,
#उर्मिलामाधव् ...
12.6.2015
क़ीमती कहा
सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा,
लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा,
इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !!
मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ??
उर्मिला माधव..
12.6.2017
Sunday, 8 June 2025
हटाओ चिलमन
हटाओ चिलमन इधर तो आओ मिलाओ नज़रें कि हम खड़े हैं,
अगर मुहब्बत है तुमको हमसे,तो तुम बड़े हो कि हम बड़े हैं??
क्या ये सही है दरूँ तआल्लुक़ ये सिलसिला भी दर पेश आए??
कि हर जमाल-ओ-अना से लड़के तुम्हारी दहलीज़ पै हम चढ़े हैं..
उर्मिला माधव
9.6.2013
Thursday, 5 June 2025
उम्मीदें
यौमे चारागर(doctors day)
हमारी बढ़ते हुए दर्द से उड़ें नींदें,
अगरचे फिर भी हैं कुछ चारागर से उम्मीदें,
अज़ाब ये कि यही वक़्त का तक़ाज़ा है,
वगरना रिसते हुए ज़ख़्म अपने ख़ुद सीं दें..
#उर्मिलामाधव
Wednesday, 4 June 2025
मोर की नाईं
कै मन में हूक उठ रई ऐ हवा में सोर की नाईं,
मगर चुपचाप बैठे हैं,सभा में चोर की नाईं,
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