Monday, 28 October 2024

दांव पे सारी दौलत

दांव पे सारी दौलत लगा दी गई
एक महफ़िल ही दर पे सजा दी गई,

अपनी तसवीर हर जा बना दी गई
आईनों से हक़ीक़त छुपा दी गई,

एक सीढ़ी कि जिससे गए बाम तक,
भीड़ समझी गई बस हटा दी गई,
उर्मिला माघव

Sunday, 27 October 2024

तसवीर तो लगाओ

तुम शेर कह रहे हो, तसवीर तो लगाओ,
कैसे पता चलेगा ये कौन कह रहा है?
उर्मिला माधव

Saturday, 19 October 2024

मिल गए ग़ालिब हज़ारों

मिल गए ग़ालिब हज़ारों, और कुछ अहमद फ़राज़,

इक सह्ल किरदार मिलना, ख़ास मुश्किल हो गया...
उर्मिला माधव

इंतेहा कहाँ होगी

ज़ब्त की इंतेहा कहाँ होगी
हमने मरते हुए भी आह न की 
उर्मिला माधव

अक़्ल से पैदल लड़की

No concern with facebook people..

ये तो सच है अक़्ल से पैदल है लड़की,
हां मगर वो शेर अच्छे कह रही है..

हंस के वो कहती है अपनी बात सारी,
रंज के साए में कब से रह रही है..
उर्मिला माधव

Friday, 18 October 2024

बदलती देखी है

मैंने दुनिया रोज़ बदलती देखी है,
नक़्क़ालों से ख़ासी फलती देखी है,
आप कहाँ हैं, क्या हैं, इसके क्या मानी,
खोटी-गोटी हर पल चलती देखी है,
उर्मिला माधव

Wednesday, 16 October 2024

रहना पड़ता है

टूटे फूटे पैरों से भी चलते रहना पड़ता है,
सूरज की मानिंद हमेशा ढलते रहना पड़ता है,
ख़ाब हमेशा टंगे रहे हों जब घर की दीवारों पर,
ताली वाले हाथों को भी मलते रहना पड़ता है,
उर्मिला माधव

हिज्र की हुज़ूर

रातें बहुत शुमार हुईं, हिज्र की हुज़ूर,
अब दिनकी मुश्किलों का भला क्या जवाब हो
उर्मिला माधव

जब मेरी इज़्ज़तों का

जब मेरी इज़्ज़तों का जनाज़ा निकल गया,
हर आदमी ही मुझसे शनासा निकल गया,

हाथों से रोकती थी मुक़द्दर को हर नफ़स,
कैसे बताऊँ बच के ज़रा सा निकल गया,
उर्मिला माधव

ऊपर उठो ना

अय मियाँ तुम इश्क़ से ऊपर उठो ना ज़िन्दगी इसके भी आगे ख़ूबरू है....
सारी दुनियां बस यहीं तक ही नहीं है,जो कि वक्ती तौर पर बस रु-ब-रु है......
उर्मिला माधव....

हमारे दिल जिगर में

हमारे दिल जिगर में भी हज़ारों दर्द पलते हैं,
समझ लो वज़्न ये सारे हमारे साथ चलते हैं...
उर्मिला माधव

साँसों का खेल

सिर्फ़ साँसों का खेल सारा है,
बेसबब जिस्म सबको प्यारा है,
उर्मिला माधव

सिमटना है

कभी हमसे लिपटना है,कभी खुद में सिमटना है,
समझ मैं ही नहीं आता हमें कैसे निपटना है?

मुहब्बत मैं नज़रबंदी हमेशा दिल से होती है,
जिसे कहते हैं सब हटना वही दरअस्ल सटना है.
उर्मिला माधव...

Friday, 4 October 2024

तुम्हें देखा तो ये जाना

तुम्हें देखा तो ये जाना कि दुनिया और भी कुछ है
वगरना पूछ लो उनसे जो तरसे हैं तबस्सुम को..
उर्मिला माधव