ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 14 December 2021
hum udaasi odh kr
हम उदासी ओढ़ कर अब ...सो रहे हैं,
ख़्वाब का अरमां जगा कर क्या करेंगे?
नींद के भी ......ऐहतरामन मुंतज़िर हो,
कुछ बहाने ओढ़ कर ....…सोचा करेंगे..
उर्मिला माधव,
15.12.2017
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