Thursday, 2 December 2021

aao dekho raat hai or tum nahin

हां मैं तनहा हूँ मगर ...ग़ाफ़िल नहीं,
तुम नहीं तो ज़ीस्त का साहिल नहीं,
इंतिहाई ज़ियादती है .......मुझपे ये,
अब ये मेरा .दिल भी मेरा दिल नहीं,
तुमसे मेरी ज़ात है और तुम नहीं,
आओ देखो रात है और तुम नहीं...
उर्मिला माधव ..
2.12.2016

No comments:

Post a Comment