ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 9 September 2017
मुहब्बत चुक गई है तो,....वतन के वास्ते लिख्खो,
किसी मजबूर के ग़म की चुभन के वास्ते लिख्खो,
तुम्हारे ग़म से भी बढ़कर जहां में ..सैकड़ों ग़म हैं,
अगर ये भी नहीं मुमकिन,सुख़न के वास्ते लिख्खो..
उर्मिला माधव,
31.8.2017
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