ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 2 November 2023
आना-जाना आपका
याद हमको आ गया वो मुस्कुराना आपका,
और बिना चाहे भी जब-तब हक़ जताना आपका,
गाहे-गाहे आपकी भी दास्तां सुनते थे हम,
जब हुआ करता था हरदम, आना-जाना आपका,
उर्मिला माधव
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