ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 30 April 2022
सजदा किया हमने वहीं
जब जहाँ तबियत हुई सजदा किया हमने वहीँ,
कौन इतना फ़र्क़ करता, घर है या दैर-ओ-हरम,
उर्मिला माधव
30.4.2018
Thursday, 28 April 2022
दौड़ में शामिल नहीं
(कुछ मेरे मन की....)
मैं तो कब से कह रही हूँ बात ये,
मैं किसी भी दौड़ में शामिल नहीं..
बिन हुनर ही हाथ में आ जाए जो,
ये अगर हासिल है तो हासिल नहीं...
- उर्मिला माधव
Thursday, 14 April 2022
सन्नाटों ने घर को
सन्नाटों ने ...घर को आकर घेरा है,
कोने-कोने ......वीरानी का डेरा है,
टूटे-फूटे ख़्वाब पड़े मिल सकते हैं,
फ़िक़्र नहीं है इनका कौन लुटेरा है...
#उर्मिलामाधव...
15.4.2015...
Tuesday, 12 April 2022
राधा रख लिया है
नाम देखो अपना ..राधा रख लिया है,
सच मगर ये है कि आधा रख लिया है,
ये मिलाया जायेगा जब भी तुम्हारे नाम से,
तब पुकारे जाओगे तुम भी तो राधे श्याम से....
#उर्मिलामाधव....
13.4.2015।..
Saturday, 9 April 2022
कश्ती उतारी होती
चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव....
10.4.2015...
हासिल करेंगे अब
उसको मिटाके लोग क्या हासिल करेंगे अब?
जो ज़िन्दगी कभी की मेरी ख़त्म हो गई...
उर्मिला माधव ......
10.4.2015
हमारे ख़ाब
हमारे ख्वाब भी तनहाई में निखरते हैं,
वगरना भीड़ में तो वक़्त गिनना पड़ता है .
उर्मिला माधव
10 .10 .2017
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