ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 19 September 2020
दुनियां में
बंसी बारे लाज राखियो दुनियां में,
हारूँ नईं मैं बात राखियो दुनियां में,
कौन काऊकौ संग देतु ऐ, मुस्किल में,
तू बस अपनों साथ राखियो दुनियां में,
लौट फेर कें, तेरौ ई नाम मुनव्वर बस,
जे जलवा दिन रात राखियो दुनियां में,
उर्मिला माधव
बिन नें तौ
ओछी हरक़त भारी कर दई बिननें तौ,
अपनेई घर की थारी भर दई बिननें तौ,
जीभ ते बस ईमान दिखामें दुनियां कूँ,
मूड़न पे बेगारी धर दई बिननें तौ,
बीच गैल में पत्थर धर कें चल दीन्हे,
रस्तन कूँ लाचारी कर दई बिननें तौ,
अपनी आप बड़ाई कर कें नाच रहे,
बे-मतलब बीमारी कर दई बिननें तौ,
इक दूजे कौ ताज सम्हारें फिर रए ऐं,
सब दुनियां की ख्वारी कर दई बिननें तौ,
उर्मिला माधव
18.9.2019
Monday, 14 September 2020
क़ाबू में रखनी चाहिए
एक शेर....
बेअदब होना मुहब्बत की बहुत तौहीन है,
है यही बेहतर जुबां क़ाबू में रखनी चाहिए....
हरजाई है
Dil yahi kahta rahaa ......wo aadatan harjaai hai,
Phir bhi hamne uski khaatir anjuman sajwaai hai...
..
दिल यही कहता रहा .......वो आदतन हरजाई है,
फिर भी हमने उसकी खातिर अंजुमन सजवाई है..
#उर्मिलामाधव
14.9.2015
मुअय्यन है
एक शेर--------
दिन,जगह और वक़्त,सब कुछ था मुअइय्यन मौत का,
हर हिफाज़त आदमी..............ता उम्र करता ही रहा..
::
Din jagah or waqt sab kuchh tha muaiyyan maut kaa,
Har hifazat aadmii ...................taa umr karta hii rahaa
#उर्मिलामाधव..
14.9.2015
Tuesday, 8 September 2020
भाग दौड़ है
है जब तलक ये ज़िन्दगी तो भाग दौड़ है,
थम जाए अगर सांस तो फ़िर बात और है,
उर्मिला माधव...
8.9.2015
छोड़ना पड़ा
दिल अपना हमको ज़ोर-ओ-ज़बर तोड़ना पड़ा,
मुंह तुझसे हमको ...अहले नज़र, मोड़ना पड़ा
हर रोज़ मर रहे थे ......बहोत सोच -सोच कर,
चाहत को अपनी .वक़्त-ए-सफ़र छोड़ना पड़ा,
उर्मिला माधव..
8.9.2016
Sunday, 6 September 2020
राम कसम
जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है,"राम कसम" हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थितप्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे....अपने हाथों बोये नहीं हैं.
उर्मिला माधव..
Wednesday, 2 September 2020
ज़रिया बहुत है
तुम्हारा ख्व़ाब में आकर चले जाना
सुकून -ए-दिल को ये ज़रिया बहुत है
तुम अपनी चाहतों से नापलो चाहे,
मेरा दिल आज भी दरिया बहुत है,
उर्मिला माधव ...
3.9.2013
किरदार है
गुल बनेंगी एक दिन कलियां सभी,
फिर तो बाक़ी, वक़्त का किरदार है..
उर्मिला माधव...
3.9.2017
क्या फ़र्क़ है
आप जब दिल से उतर के गिर गए,
आइये या जाइये क्या फ़र्क़ है ?
उर्मिला माधव
दरिया बहुत है
तुम अपनी चाहतों से नापलो चाहे,
मिरा दिल आज भी दरिया बहुत है,
तुम्हारा ख्व़ाब में आके चले जाना,
मुहब्बत के लिए ज़रिया बहुत है
उर्मिला माधव
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