Thursday, 30 April 2020

ज़रूरी है

muhabbat main taghaful ka chalan to be shaoori hai,
tajurbekaar kahte hain ki doori bhi zaroori hai..........Urmila Madhav
30.4.2013

ज़िंदगी

आभार Urmila Madhav जी 
  
उम्र भर हमने चुकाई,पाई-पाई ज़िन्दगी,
खर्च पूरी हो गई कितनी बचाई ज़िन्दगी.....

उर्मिला माधव.

प्यार का पल होगया

ऐसे लम्हों में लिखा बस प्यार का पल होगया,
उसकी आमद से हर इक मिसरा मुक़म्मल होगया...
#उर्मिलामाधव...
30.4.2015...

दैर ओ हरम

जब जहाँ तबियत हुई सजदा किया हमने वहीँ,
कौन इतना फ़र्क़ करता, घर है या दैर-ओ-हरम,
उर्मिला माधव
30.4.2018

Tuesday, 28 April 2020

ख़्वाब नहीं

Wo haqiqat hai koii khwaab nahin,
Phir bhii tasviir ka jawaab nahin,
Yun to hain khushbuen bahut saari,
Uskii khushboo sii kaamyaab nahin....
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वो हक़ीक़त है कोई ख्वाब नहीं,
फिर भी तस्वीर का जवाब नहीं,
यूँ तो हैं .....खुशबुएँ बहुत सारी,
उसकी खुशबू सी कामयाब नहीं....
#उर्मिलामाधव...
29.4.2015...

भगवान जी बतलाएंगे

फ़िक़्र मंदी और रक़ाबत,दोनों मिलकर आगए,
आगे क्या होना है ...ये भगवान जी बतलाएंगे..
उर्मिला माधव,
29.4.2017

संभाला हमने

उम्र भर साख़ ओ ईमान संभाला हमने,
ख़ुद को कोने में कहीं, जान के डाला हमने,

जिसको देखो वो गुनहगार कहे जाता था,
दिल के दुखने को बड़ी देर तक टाला हमने,
उर्मिला माधव

झिझोड़ा गया

कितने रंगों से दिल को झिंझोड़ा गया,
बिखरी साँसों को रह-रहके तोडा गया,
मेरी आदत यही थी तो होता भी क्या,
मुझसे लिखना-लिखाना न छोड़ा गया....
उर्मिला माधव...
28.4.2014..

इंतेहा करदे

Be-wafa ho ja magar yun, ke inteha karde,
Baad phir iske koii......tere muqabil ho nahin
::::
बे-वफ़ा हो जा मगर यूँ, के इन्तहा करदे,
बाद फिर इसके कोई तेरे मुक़ाबिल हो नहीं,
Urmila Madhav....
28.4.2016

खड़े रहे

पानी के इक गिलास का जो क़र्ज़ हो गया
हम उम्र भर ...उसी की सतह पर खड़े रहे ....
उर्मिला माधव,
28.4.2017

Friday, 24 April 2020

मरासिम

इक मरासिम था सो भी टूट गया,
जो कभी मुख़्तसर नहीं होता,
अब मिरा फ़ैसला भी सुन लीजै,
अब यहां कुछ असर नहीं होता,
उर्मिला माधव
तिफ़ल अगर तिफ़्ल है तब बह्र ठीक होगी अगर तिफ़ल है तो ठीक नही, इसी प्रकार ज़हन भी यदि ज़ह्न है तो ये मिसरा ठीक नहीं है ।अभी यहां ज़हन और तिफ़ल का वज़न 12 ले रहे ह

Wednesday, 22 April 2020

क़ायम मेरी

हैं अजल तक कोशिशें,क़ायम मेरी,
ज़िंदगी समझें न वो दायम मेरी,
उर्मिला माधव...
22.4.2015

जंजीर में

आपने सोने की कड़ियाँ क्यूं रखीं ज़ंजीर में,
गो कि सब इल्ज़ाम भी मेरे ही सर आते गए...
उर्मिला माधव,
22.4.2018

Sunday, 19 April 2020

सब्र कर नहीं पाते

ये कौन लोग हैं जो सब्र कर नहीं पाते,
ख़मोश होके .कहीं से गुज़र नहीं पाते,
जो अपने हाथ में मीज़ान लेके चलते हैं,
एक सुफ़ह भी शिद्दत से भर नहीं पाते,...
उर्मिला माधव,
19.4.2017

Saturday, 18 April 2020

कैसे हो

दिल में हुज्जूम-ए-ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुर्दार हो चुके हैं इबादत के बलबले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013

उभर नहीं जाता

दर्द जब तक उभर नहीं जाता,
उम्र भर भी नज़र नहीं आता,
जिसका ग़र्दिश में वक़्त होता है,
कोई भी उसके घर नहीं जाता।....Urmila Madhav..
19.4.2013

थोड़ा न होता

वक़्त ने जो इस क़दर तोड़ा न होता,
साथ खुशियों ने कहीं छोड़ा न होता,
शौक़ हो जाता.....तिरे हाथों से पूरा,
जितना हो जाता वही थोड़ा न होता....
उर्मिला माधव...
19.4.2014...

क्या ख़ूब है

तस्वीरी क़ता---
Das rahaa hai aadmi ko aadmi kya khoob hai,
Aisi fitrat kyun hamaare naam se mansoob hai,
Rah gaya hai munh khula hairat se ,sabko dekh kar,
Ham n apni zaat ko daste hain ye usloob hai..
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डस रहा है आदमी को आदमी,क्या ख़ूब है,
फिर ये फितरत क्यूँ हमारे नाम से मंसूब है,
रह गया है मुंह खुला हैरत से,सबको देख कर,
हम न अपनी ज़ात को डसते हैं,ये उसलूब है...
उर्मिला माधव,
19.4.2016

दोहा

इतना आसां भी नहीं, दुनियां का हर रंग,
जितने गहरे हम गए, उतने रह गए दंग..
उर्मिला माधव

घूम रही हूँ

बुतख़ानों के शह्र में ज़िंदा घूम रही हूँ,
बिलकुल तनहा हूँ शर्मिंदा घूम रही हूँ,
सोच रही हूँ उंगली से सब छूकर देखूं,
हो सकता है कुछ आइन्दा घूम रही हूँ....
उर्मिला माधव...
19.4.2018...

अच्छा लगे

तू मिरा लख़्ते जिगर है और मेरी ज़िंदगी,
तेरी आँखों से ये दुनिया देखना अच्छा लगे..
उर्मिला माधव

खाता

जो अगर फ़रहाद सब कुछ मान जाता,
ठोकरें हिस्से की उसके.....कौन खाता...?? 
::
Jo agar farhad sab kuchh maan jaataa,
Thokaren hisse kii uske kaun khaataa...
उर्मिला माधव...
19.4.2016...

Wednesday, 15 April 2020

दुखाना चाहता है

London, United Kingdom.

Kyun usika ....dil dukhana chahta hai,
jisko ik arse se ....paanaa chahta hai.
uski aankhon men likhi hai,jo haqiqat.
apne hathon se ....mitana chahta hai....
Pranav .....

Tuesday, 14 April 2020

देखो ना

ज़िन्दगी.......तार-तार देखो ना,
ज़ख्म के.......आर पार देखो ना,
ये भी हैरत है तुम समझ न सके,
आओ तब......बार-बार देखो ना....
उर्मिला माधव...
14.4.2014...

हल्की हल्की

कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की,
मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी,
#उर्मिलामाधव....
14.4.2015..

कार ए हुनर

पांव धंस जाते हैं मेरे.....इतनी गीली है ज़मीं,
ये मिरा कार-ए-हुनर है,आज भी चलती हूँ मैं....
उर्मिला माधव,
14.4.2017

कुंदन हुई

दर्द के शोलों पे चल के,ज़िंदगी कुंदन हुई
अब भला लू के थपेड़े,.क्या बिगाड़ेंगे मेरा..
14.4.2017

Friday, 10 April 2020

सांसें अज़ाब में हैं

ये जिस्म एक क़फ़स है,साँसें अज़ाब में हैं,
तू ज़िन्दगी के मालिक ,जिंदा बचाए रखना,
अश्कों से भीगे आरिज़,बेबाक़ हो गए हैं 
दूरी हो चाहे जितनी,दिल तो मिलाये रखना....
उर्मिला माधव...
11.4.2015

Wednesday, 8 April 2020

रहने दिया

dil ko jo sahana tha wo sahne diya'
Baqi jo qissa tha wo rahne diya..
Urmila Madhav

बादशा हुआ

जिस तक पहुंच नहीं है,वही बादशा हुआ,
वरना ज़मीं के लोग तो हम से ही हैं हुज़ूर..
उर्मिला माधव...
9.4.2017

धता बताई

तुम्हारी फ़ितरत समझ में आई तो मैंने तुमको धता बताई,
फ़िर अपनी सारी सहेलियों को, तुम्हारी हर इक ख़ता बताई

Tuesday, 7 April 2020

लनतरानी में गई

Ban ke jo taiyyar thi, tasveer paani me gaii,
Ek kahaani khoob thii jo, lan taraanii me gaii..

बन के जो तैयार थी तस्वीर, पानी में गई,
इक कहानी ख़ूब थी,जो लनतरानी में गई...
उर्मिला माधव
8.4.2018

Monday, 6 April 2020

आना है

Hukm hamko hua ke aanaa hai,
Ham bhi bistar se uth ke ja pahunche,

हुक्म हमको हुआ ....के आना है,
हम भी बिस्तर से उठके जा पहुंचे..
उर्मिला माधव
7.4.2018

रख्खा है

Maine khud ko sambhaal rakhkha hai,
Dard kaandhe pe daal rakhkha hai,

Gam sabhi zindagi men  pinhaaN hain,
Kya kahi arz-e-haal rakhkha hai?

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
दर्द ....कांधे पे डाल रख्खा है,

ग़म सभी ज़िन्दगी में पिनहां हैं,
क्या कहीं अर्ज़-ए-हाल रख्खा है?
उर्मिला माधव,
7.4.2018

Friday, 3 April 2020

मुसलमान कर दिया

[4/4, 12:01 AM] Urmila Madhav: हमतो बस नाचीज़ हैं, किस सम्त को उड़ जाएंगे,
हां ये मुमकिन है किन्हीं वर्क़ों पे मिल सकते हैं हम 
उर्मिला माधव
[4/4, 12:03 AM] Urmila Madhav: दुनिया की हरक़तों ने..परेशान कर दिया,
कुछ और न हुआ तो बयाबान कर दिया,
हिन्दू कहा हमें तो कभी..और कुछ कहा,
तबियत जो होगई तो मुसलमान कर दिया....
उर्मिला माधव...

Wednesday, 1 April 2020

पनीर हो

ऐसी रेसीपी क्या खाना जिसका नाम पनीर हो,
अगल-बगल में नॉनवेज की गड़ी हुई शमशीर हो,
उर्मिला माधव
😢😢😢😢😢

वरक़ों पे मिल सकते हैं हम

हमतो बस नाचीज़ हैं, किस सम्त को उड़ जाएंगे,
हां ये मुमकिन है किन्हीं वर्क़ों पे मिल सकते हैं हम 
उर्मिला माधव