ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 23 March 2024
आसमान
भले तुम आसमां छूना, ज़मीं पर भी क़दम रखना,
बिना पंखों के उड़ने का नतीजा इक ज़मीं है बस..
उर्मिला माधव
Friday, 15 March 2024
उदासी का
याद है दिन बहुत उदासी का,
दिल पे है बोझ ग़म शनासी का,
हम ने देखा नहीं किसीकी तरफ़,
ऐसा आलम था बदहवासी का..
उर्मिला माधव
Wednesday, 6 March 2024
सब्ज़ होते हैं
बुजुर्गों की मुहब्बत के सहारे सब्ज़ होते हैं,
हमेशा मुश्किलों के वक़्त वो महसूस होते हैं,
ख़ुशी होती है,गर शादाब बेलें लहलहाती हैं,
शजर के साये,उनके वास्ते,मह्फूज़ होते हैं...
उर्मिला माधव...
सब्ज़---हरे
शादाब---हरा-भरा
शजर---पेड़
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