ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 18 February 2024
देर होगई
अब तुमसे क्या कहें कि बहुत देर होगई,
अब जाएं या रहें कि बहुत देर हो गई..
ता उम्र हम चले हैं इसी एक राह पर,
तब किस से ये कहें कि बहुत देर होगई,
उर्मिला माधव
Monday, 12 February 2024
मुस्कुराते हैं
आज लो फिर से मुस्कुराते हैं,
जब्र ही है तो ग़म मिटाते हैं,
अपनी दुनियां में साफ़ गोई है,
लोग छुप छुप के मुस्कुराते हैं,
हमको है शौक़ डूब जाने का
गो कि क़सदन ही पार जाते हैं,
जब कभी रू ब रू हक़ीक़त हो,
झूट का मुंह कहाँ छुपाते हैं..
उर्मिला माधव
वालिद ए हसनैन
देख लीजै हम कहाँ बेचैन हैं,
अपनी ज़ाती ज़िंदगी पर ऐन हैं,
जो भी कहना है, कहेंगे उम्र भर,
मानो हक़ पर वालिद ए हसनैन हैं..
क्या हुआ जो आपके सक़लैन हैं...
उर्मिला माधव
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