ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 29 November 2023
ज़ख़्म
ये ऐसे ज़ख़्म हैं जिनका कोई बदल ही नहीं,
किसीका यूं ही बिछड़ जाना फिर नहीं आना
उर्मिला माधव
Thursday, 2 November 2023
आना-जाना आपका
याद हमको आ गया वो मुस्कुराना आपका,
और बिना चाहे भी जब-तब हक़ जताना आपका,
गाहे-गाहे आपकी भी दास्तां सुनते थे हम,
जब हुआ करता था हरदम, आना-जाना आपका,
उर्मिला माधव
Friday, 20 October 2023
तोड़ दिया
ज़रा सी देर सही, तुमको हमने छोड़ दिया,
बहुत पुराना मरासिम था तुमसे, तोड़ दिया
उर्मिला माधव
Saturday, 9 September 2023
दीवानगी
यूं मुहब्बत तो हम भी करते हैं,
तुम सी दीवानगी नहीं हम को..
उर्मिला माधव
Friday, 18 August 2023
धड़कनें चीखीं
हम हुए ख़ामोश तो फिर धड़कनें चीखीं बहुत,
हम कलेजा थाम कर, कब तक खड़े रहते वहां..
उर्मिला माधव
Thursday, 17 August 2023
जो क़ाफ़िए और बह्र को
जो क़ाफ़िए और बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं, किसी बदहवास को,
जीते हैं अपने तौर पे, हम अब भी आज भी,
हम जानते कहाँ हैं, किसी ग़मशनास को...
उर्मिला माधव
काट दी
जो क़ाफ़िए और बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं, किसी बदहवास को,
जीते हैं अपने तौर पे, हम अब भी आज भी,
हम जानते कहाँ हैं, किसी ग़मशनास को...
उर्मिला माधव
Friday, 14 July 2023
देखा नहीं है
मैंने उसको आज तक देखा नहीं है,
क्या है ये एहसास जो हटता नहीं है,
तुम मगर इस चांद से गोरे न होना,
दिल पे ये ही रंग तो चढ़ता नही है,
उर्मिला माधव
Sunday, 18 June 2023
सन्नाटा है
दिल में भी इक भीड़ भरा सन्नाटा है,
इस पै चल के कोई भी आता-जाता है,
इस दुनियां पर सारी दुनिया क़ाबिज़ है,
रोज़ मदारी अपना खेल दिखाता है..
उर्मिला माधव
Tuesday, 13 June 2023
हिज्र का मौसम
हिज्र का मौसम बहुत लंबा चला है,
अब हमारे साथ हम हैं और ख़ला है,
जिस्म है तो साथ में कुछ और भी है,
ज़िन्दगी को लोग कहते थे बला है..
उर्मिला माधव
Wednesday, 7 June 2023
बाख़ुदा
ज़ह्र हैं नज़दीकियाँ भी बा ख़ुदा
फ़ासलों के ज़ाविए, मक़बूल हैं
उर्मिला माधव
Tuesday, 30 May 2023
किनारे कर दिए
राबिते जब इक किनारे कर दिए,
ठोकरों पर सब इशारे कर दिए,
कौन कब आया-गया ये क्या ग़रज़,
सब जुदा ....हमने हमारे कर दिए,
#उर्मिलामाधव...
30.5.2015
Tuesday, 18 April 2023
कर डालीं
हमने खुशियां तमाम कर डालीं,
मुश्किलें अपने नाम कर डालीं,
ज़िन्दगी तेरा ग़म चुकाने को,
अपनी सांसें हराम कर डालीं
उर्मिला माधव
Monday, 10 April 2023
kashish
दुर ए दिंदान और आंखें नशीली,
इस कशिश का कोई क्या सानी रहेगा?
उर्मिला माधव
मंहगी पड़ी है
ज़िन्दगी मुझको बहुत मंहगी पड़ी है,
पर ग़मों की दास्तां पीछे रखी है।
कोई भी तन्हाई में जीने कहाँ दे,
दह्र में हर रोज़ ही रस्सा कशी है।
उर्मिला माधव
Saturday, 25 February 2023
चाहिए
मुश्किलों के साथ चलना चाहिए,
रात में भी दिन निकलना चाहिए,
चांद दिन भर साथ ही चलता रहे,
रात दिन सूरज को ढलना चाहिए
उर्मिला माधव
😊😊
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